अमेरिका से भारत को झटका: एनएसए डोभाल को पन्नू की हत्या की साजिश में समन जारी


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-02 15:36:56



 

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को खालिस्तानी समर्थक नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश से जुड़े एक मामले में समन जारी किया है। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है और भारत-अमेरिका संबंधों में नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।

मामला: पन्नू की हत्या की साजिश

गुरपतवंत सिंह पन्नू, जो सिख फॉर जस्टिस (SFJ) संगठन के प्रमुख हैं, ने अमेरिकी संघीय अदालत में एक दीवानी मुकदमा दायर किया है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत सरकार, एनएसए अजीत डोभाल, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के पूर्व प्रमुख सामंत गोयल, RAW एजेंट विक्रम यादव और भारतीय व्यवसायी निखिल गुप्ता ने उनकी हत्या की साजिश रची। पन्नू का दावा है कि यह साजिश उस समय विफल हो गई जब निखिल गुप्ता द्वारा नियुक्त शूटर वास्तव में एक अंडरकवर अमेरिकी एजेंट निकला। 

समन जारी करने की प्रक्रिया

अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, पन्नू ने दो कानूनी एजेंसियों और एक निजी जांचकर्ता की मदद से अमेरिका में डोभाल के दौरे के दौरान उन्हें समन सौंपने की व्यवस्था की। हालांकि, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने समन स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद, अदालत के आदेश के तहत, डोभाल को वैकल्पिक माध्यमों से समन जारी किया गया। अब, डोभाल को 21 दिनों के भीतर अमेरिकी अदालत में इस मुकदमे का जवाब देना होगा। 

भारत सरकार की प्रतिक्रिया

इस समन के जवाब में, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे "पूरी तरह से अनुचित" करार दिया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, "जब यह मामला हमारे सामने आया, तो हमने कार्रवाई की। इस मामले में उच्च स्तरीय समिति भी बनाई गई है।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पन्नू एक गैरकानूनी संगठन से जुड़ा है, जिस पर UAPA के तहत प्रतिबंध लगाया गया है। 

पन्नू का इतिहास और संगठन

गुरपतवंत सिंह पन्नू सिख फॉर जस्टिस (SFJ) नामक संगठन के प्रमुख हैं, जो खालिस्तान के समर्थन में सक्रिय है। भारत सरकार ने 2019 में SFJ पर प्रतिबंध लगाया था और 2020 में पन्नू को आतंकवादी घोषित किया था। पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता है और वह लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहा है। 

अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और आगे की कार्रवाई

यह मामला भारत-अमेरिका संबंधों में नई चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है। अमेरिकी अदालत द्वारा समन जारी करने से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रही है और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगी। आगे की कार्रवाई में, भारतीय अधिकारी अमेरिकी न्याय प्रणाली के साथ सहयोग करते हुए अपने पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत करेंगे।


global news ADglobal news AD