(मुझे मिल गया बहाना तेरी दीद का, ऐसी खुशी लेकर आया चांद) रमजान 2025: चांद के दीदार से शुरू हुआ पवित्र महीना, पहला रोजा आज
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-03-02 07:10:27

माह-ए-रमजान की दिली मुबारकबाद
इस्लाम धर्म में रमजान का महीना विशेष पवित्रता और महत्व रखता है। यह महीना आत्मसंयम, इबादत और परोपकार का प्रतीक है। रमजान की शुरुआत चांद के दीदार से होती है, जो मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है।
भारत में रमजान का चांद दिखाई दिया
भारत में 1 मार्च 2025 को रमजान का चांद नजर आया, जिससे रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत की पुष्टि हुई। देश के विभिन्न हिस्सों में मुस्लिम समुदाय ने चांद का दीदार किया और मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की।
पहला रोजा आज
चांद के दिखाई देने के साथ ही, भारत में पहला रोजा 2 मार्च 2025 को रखा जाएगा। मुस्लिम समुदाय के लोग सहरी और इफ्तार की तैयारियों में जुट गए हैं।
रमजान का महत्व और इतिहास
रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसमें पैगंबर मोहम्मद को पवित्र कुरान का ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह महीना आत्मसंयम, इबादत और जरूरतमंदों की मदद के लिए जाना जाता है। रोजा रखना, पांच वक्त की नमाज अदा करना और तरावीह की विशेष नमाज पढ़ना इस महीने के मुख्य अंग हैं।
रोजा रखने की प्रक्रिया
रोजा रखने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से पहले सहरी करते हैं, जिसमें हल्का भोजन किया जाता है। इसके बाद, पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए रहते हैं और सूर्यास्त के समय इफ्तार के साथ रोजा खोलते हैं। इफ्तार में खजूर और पानी का सेवन आम है, इसके बाद अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है।
रमजान के तीन अशरे
रमजान के महीने को तीन अशरों में बांटा गया है:
पहला अशरा (रहमत के 10 दिन): यह चरण अल्लाह की रहमत (दया) का प्रतीक है।
दूसरा अशरा (मगफिरत के 10 दिन): यह चरण मगफिरत (माफी) का है, जिसमें मुसलमान अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।
तीसरा अशरा (नजात के 10 दिन): यह चरण जहन्नम (नरक) से निजात (मुक्ति) का है।
ईद-उल-फितर की तैयारी
रमजान के अंत में ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है, जो रोजों के समापन का प्रतीक है। यह त्योहार खुशी, एकता और भाईचारे का संदेश देता है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, विशेष नमाज अदा करते हैं और एक-दूसरे के घर जाकर मिठाइयां बांटते हैं।
रमजान का महीना मुस्लिम समुदाय के लिए आत्मशुद्धि, इबादत और परोपकार का समय है। यह महीना समाज में एकता, भाईचारा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। चांद के दीदार के साथ ही, इस पवित्र महीने की शुरुआत होती है, जो आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।