खाटू श्यामजी फाल्गुनी लखी मेला: भक्ति और उल्लास का महापर्व


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-03-01 15:32:56



 

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्यामजी मंदिर में आज से वार्षिक फाल्गुनी लखी मेले का शुभारंभ हुआ है। यह मेला हर वर्ष फाल्गुन मास में आयोजित होता है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इस वर्ष मेले का आयोजन 28 फरवरी से 11 मार्च तक किया जा रहा है।

मेले की शुरुआत और विशेष व्यवस्थाएँ

मेले के पहले दिन ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष परिवहन, सुरक्षा और मंदिर सजावट की व्यवस्थाएँ की हैं। सीकर जिला कलेक्टर ने बताया कि मेले के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसमें पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता शामिल है।

खाटू श्यामजी मंदिर का इतिहास

खाटू श्यामजी मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्त बर्बरीक को वरदान दिया था कि कलियुग में वे श्याम के नाम से पूजे जाएँगे। बर्बरीक का शीश खाटू नगरी में पाया गया, जहाँ वर्तमान में यह भव्य मंदिर स्थित है। यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना है और इसकी वास्तुकला अद्वितीय है, जो श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करती है।

श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह

मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बनता है। भक्तजन खाटू श्यामजी के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा करके यहाँ पहुँचते हैं, जिसे 'पदयात्रा' कहा जाता है। यह पदयात्रा भक्तों के लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव होता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और मनोरंजन

मेले के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें लोक संगीत, नृत्य और नाटक शामिल हैं। इसके अलावा, मेले में झूले, खेल और खाने-पीने के स्टॉल भी लगाए गए हैं, जो बच्चों और बड़ों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। स्थानीय हस्तशिल्प और वस्त्रों की दुकानें भी मेले में सजाई गई हैं, जहाँ से श्रद्धालु स्मृति चिह्न और उपहार खरीद सकते हैं।

प्रशासन की अपील

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मेले के दौरान कोविड-19 से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें, जैसे मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखना और नियमित रूप से हाथ धोना। साथ ही, प्रशासन ने यह भी अनुरोध किया है कि भक्तजन मेले में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और कचरा निर्धारित स्थानों पर ही डालें।

खाटू श्यामजी का फाल्गुनी लखी मेला आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक समागम का प्रतीक है। यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी इसका विशेष महत्व है। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस मेले की भव्यता और महत्ता को दर्शाती है।


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