मरा कौन? अस्पताल ने जिंदा पुजारी को सौंपा उसी के नाम पर दर्ज शव 


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-28 20:38:18



 

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के कांट गांव में एक साधु की मृत्यु के बाद एक अनोखी घटना सामने आई है, जहां बीमार साधु का इलाज करवाने वाले पुजारी को साधु की मृत्यु के बाद अस्पताल ने उसी पुजारी के नाम पर दर्ज शव उसे सौंप दिया।

साधु की तबीयत बिगड़ना और अस्पताल में भर्ती

कांट गांव स्थित बालाजी मंदिर के पुजारी चतरूराम मीणा उर्फ चेतनगिरी के पास 8 फरवरी को दिल्ली के नजफगढ़ निवासी साधु कुलदीप आकर ठहरे। 12 फरवरी को कुलदीप की तबीयत बिगड़ने पर, पुजारी ने उन्हें बिसाऊ और फिर झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल में भर्ती कराया। रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता होने पर, साधु के पास पहचान पत्र न होने के कारण, पुजारी ने अपना आधार कार्ड देकर रजिस्ट्रेशन करवाया। 

इलाज के दौरान साधु की मृत्यु और पहचान की समस्या

22 फरवरी को, साधु की तबीयत और बिगड़ने पर उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। अस्पताल के रिकॉर्ड में मरीज का नाम पुजारी चतरूराम होने के कारण, मृत्यु प्रमाण पत्र भी उसी के नाम से जारी हुआ। पुजारी शव को अपने गांव बिरमी लाए, लेकिन अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों ने विरोध किया। पुलिस जांच में पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में पुजारी चतरूराम की मृत्यु दर्ज हो चुकी है, जबकि वह स्वयं जीवित हैं। 

पुलिस जांच और वास्तविक पहचान की पुष्टि

धनूरी थाना अधिकारी रामनारायण चोयल ने बताया कि साधु के शव की तलाशी में एक पर्ची मिली, जिसमें कुछ मोबाइल नंबर लिखे थे। इन नंबरों पर संपर्क करने पर, मृतक की पहचान नजफगढ़, दिल्ली के कुलदीप (42) पुत्र मुरारीलाल ब्राह्मण के रूप में हुई। इसके बाद, कुलदीप के भाई मदनगोपाल को सूचना दी गई, जो झुंझुनूं पहुंचे और शव की शिनाख्त की। 

पुजारी की मानवता से उत्पन्न समस्याएं

पुजारी चेतनगिरी ने बताया कि उनकी कुलदीप से 15 साल पुरानी जान-पहचान थी, और मानवता के नाते उन्होंने अपना आधार कार्ड देकर इलाज करवाया। हालांकि, इस घटना के बाद सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। 

प्रशासन की प्रतिक्रिया और समाधान

झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल के पीएमओ राजवीर राव ने बताया कि कुलदीप के परिवार से दस्तावेज प्राप्त करने के बाद, अब उनके नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इस घटना ने आधार कार्ड और पहचान से संबंधित प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया है, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।


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