ईमानदारी और सादगी की मिसाल रामचन्द्र चावला जी की पुण्य तिथि  पिताजी —आपकी बहुत याद आई। आप ही के बताए हुए  नक्शे कदम पर चलने की पूरी कोशिश :मनोहर चावला


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-26 13:42:34



ईमानदारी और सादगी की मिसाल रामचन्द्र चावला जी की पुण्य तिथि 

पिताजी —आपकी बहुत याद आई। आप ही के बताए हुए  नक्शे कदम पर चलने की पूरी कोशिश :मनोहर चावला

आज २६ फ़रवरी को मेरे पिता श्री रामचंद्र जी चावला की पुण्य तिथि है उन्हें हमसे अलग हुए २८ साल हो गये लेकिन कोई भी दिन ऐसा नहीं गया जब मैंने उन्हें याद न किया हो। वह ईमानदारी- सादगी- ओर कड़ी मेहनत की मिसाल थे। पंजाबी समाज की एकता के लिए उन्होंने भरसक प्रयास किये। बहावलपुर पंचायत के मुखिया- अनाज कमेटी के सचिव के साथ वो एक दिल से अच्छे इन्सान थे। कहते हैं ज़माना उन्हें को ही याद करता हैं जो जीवन में कुछ कर के जाते है। पिता जी ने ऐसा ही कुछ किया। वे मृद व्यवहार के धनी थे ही,कई गौशाला के वे संरक्षक थे। और कई समाजसेवी संस्थाओं से उनका जुड़ाव था। उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आगे हमेशा कदम बढ़ाते ही गए। विभाजन कीं पीड़ा उन्होंने सही— सब कुछ छोड़ कर ख़ाली हाथ जब बीकानेर आये तब कड़ी मेहनत ओर ईमानदारी से अपना शानदार मुक़ाम बनाया। वह फर्श से अर्स तक पहुँच गए। वह पंजाबी समाज ओर व्यापारिक संगठनों से जुड़े हुए थे । उनके उत्थान के लिए भरसक प्रयास किए। वह हमेशा ओरो के लिए जिये। मेरे लिए वो प्रेरणास्रोत थे। मुझे याद है वो दिन भी जब मेरी उँगली पकड़ कर वे मुझे स्कूल छोड़ने आते थे और मुझे मेलो में भी ले जाते थे एक दिन तो मुझे कंधे पर बैठाकर पंडित नेहरू जब मेडिकल कालेज की भूमि का शिलान्यास करने बीकानेर आए थे उन्हें गुलाब दिलवाने समारोह में ले गए और वह फूल भीड़भाड़ में धक्के खाते नेहरू तक पहुचा ही दिया। कभी कभी वह मुझे अपने साथ फ़िल्म दिखाने भी ले जाते थे उन्होंने मुझे फ़िल्म दो आँखे बारह हाथ दिखाई और उसका वह गाना भी याद दिलाया — ए मालिक तेरे बन्दे हम, ऐसे हो हमारे कर्म, नेकी पे चले और बदी से टले ताकि हँसते हुए निकले दम , ए मालिक तेरे बन्दे हम। इस गाने ने मेरे जीवन पर काफ़ी प्रभाव डाला और जीवन भर नेकी पर चलने और बदी से टलने की क़सम खाई और आज जीवन के आखरी पड़ाव तक मैं पिताजी के बताए आदर्शों पर चलता रहा हूँ । उनकी सादगी और ईमानदारी एवम दूसरो की मदद करने का जज़्बा ,आज भी उनका नाम समाज में बड़े फ़क्र से लिया जाता है पंजाबी समाज के वे सिरमौर थे। और बिजनेस के वो किंग। छोटे से किराना दुकानदार से वे धान मण्डी फ़ड बज़ार के वो सर्वे सर्वा हो गए। वे सबके व्यापारिक मसले निपटने लगे। वह अपने कामों के लिए सदियों तक याद रहेंगे। मुझे गर्व हैं कि मैं उनका सुपुत्र हूँ ओर उनके आदर्शों पर चलने की पूरी कोशिश कर रहा हूँ सच्चाई ओर ईमानदारी की राह पर चलूँ यहीं मेरी भी भरपूर कोशिश हैं। उनका आशीर्वाद सदा मेरे साथ है मेरा उन्हें शत शत नमन।——-ईमानदारी और सादगी की मिसाल रामचन्द्र चावला जी की पुण्य तिथि 

 अंततः

पिताजी —आपकी बहुत याद आई। आप ही के बताए हुए  नक्शे कदम पर चलने की पूरी कोशिश लेखक ,विचारक, चिंतक, संपादक, बीकानेर एक्सप्रेस :मनोहर चावला 


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