लेखनी के वे धनी थे। सादगी की मिसाल थे सरकारी गाड़ी होते हुए भी साइकल पर चलते थे। साईकलवाले मन्त्री के नाम से विख्यात महबूब अली को शत शत नमन


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-24 06:33:40



आज पूर्व मन्त्री महबूब अली की पुण्य तिथि हैं बहुत याद आए। बीकानेर एक्सप्रेस में उन्होंने खूब लिखा। लेखनी के वे धनी थे। सादगी की मिसाल थे सरकारी गाड़ी होते हुए भी साइकल पर चलते थे। साईकलवाले मन्त्री के नाम से विख्यात महबूब अली को शत शत नमन।मेरी उनसे अच्छी खासी दोस्ती थी। मेरी पीआरओ सेवाओ के दौरान उन्होंने मेरे अख़बार बीकानेर एक्सप्रेस को संभाला। एक बार उनके लिखे एक समाचार से तत्कालीन मंत्री ललित किशोर चतुर्वेदी काफ़ी नाराज़ हुए और उन्होंने पत्र की प्रतियाँ विधान सभा में बँटवाई और अध्यक्ष को बताया कि आपके मंत्री सरकार के खिलाप विशेषकर मेरे खिलाप ऐसा लिख रहे है लेकिन कुछ सबूत न होने की वजह से मसला आगे नहीं बढ़ सका। उनसे जुड़ी एक और घटना याद आती है। जब वो मंत्री नहीं रहे तब भी हमेशा की तरह विश्व ज्योति के बाहर किराडू जी पान वाले की दुकान के आगे वे महफ़िल जमा कर बैठते और मैं भी उनमे एक होता था उस समय मोहम्मद उस्मान आरिफ़ यूपी के गवर्नर हुआ करते थे वे कार से वहाँ से अपने निवास चुनगरो के चोक जाया करते थे। वे मुझे अक्सर महबूब अली के साथ वहाँ देख लेते थे। एक दिन उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया और कहा कि तुम सरकारी नौकर हो तुम्हें फ़िरक्कापरस्त लोगो से दूर रहना चाहिए। उनका इशारा महबूब अली की और था। मैंने कहा उनसे मेरे आज से नहीं सालो से संबंध है। खैर निडर होकर मैंने अपनी दोस्ती निभाई। और वो भी अंत तक अपने स्तंभ— कचहरी परिसर से— बराबर लिखते रहे। एडवोकेट रामकृष्णदास गुप्ता उनके ख़ास मित्रो में थे। आज उन्होंने भी उन्हें यादकर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि दी है। —————   लेखक , विचारक ,चिंतक, संपादक बीकानेर एक्सप्रेस, मनोहर चावला की कलम से


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