रेडियो जगत के महानायक अमीन सयानी: प्रथम पुण्यतिथि पर विशेष श्रद्धांजलि
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-22 06:54:05

20 फरवरी 2024 को, रेडियो की दुनिया के महानायक अमीन सयानी ने 91 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनकी मधुर आवाज़ और अनोखे अंदाज़ ने दशकों तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया। आज, उनकी पहली पुण्यतिथि पर, हम उनके जीवन और योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
प्रारंभिक जीवन और परिवार
21 दिसंबर 1932 को मुंबई में जन्मे अमीन सयानी का परिवार स्वतंत्रता संग्राम से गहरा जुड़ा था। उनकी माता, कुलसुम सयानी, महात्मा गांधी की अनुयायी थीं और समाजसेवा में सक्रिय थीं। अमीन के बड़े भाई, हमीद सयानी, ऑल इंडिया रेडियो से जुड़े थे, जिन्होंने अमीन को रेडियो की दुनिया से परिचित कराया। अमीन ने ग्वालियर के सिंधिया स्कूल और मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की।
रेडियो करियर की शुरुआत
अमीन सयानी ने अपने रेडियो करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो, मुंबई से की, जहां उन्होंने अंग्रेजी कार्यक्रमों में भाग लिया। 1952 में, उन्होंने रेडियो सीलोन पर 'बिनाका गीतमाला' कार्यक्रम की मेजबानी शुरू की, जो 42 वर्षों तक श्रोताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहा। उनका विशिष्ट अभिवादन, "बहनों और भाइयों," श्रोताओं के दिलों में बस गया।
'बिनाका गीतमाला' की ऐतिहासिक सफलता
'बिनाका गीतमाला' ने न केवल श्रोताओं के बीच लोकप्रियता हासिल की, बल्कि यह फिल्मी गीतों की रैंकिंग का मानक भी बन गया। इस कार्यक्रम ने कई संगीतकारों, गायकों और गीतकारों को पहचान दिलाई। अमीन सयानी की प्रस्तुति शैली ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। उनका यह शो भारतीय रेडियो इतिहास के सबसे लंबे और सबसे प्रतिष्ठित कार्यक्रमों में से एक बन गया।
अन्य योगदान और उपलब्धियां
अमीन सयानी ने अपने करियर में 54,000 से अधिक रेडियो कार्यक्रमों का निर्माण और प्रस्तुति की, साथ ही 19,000 से अधिक जिंगल्स में अपनी आवाज़ दी। उन्होंने 'भूत बंगला', 'तीन देवियां', 'बॉक्सर' और 'कत्ल' जैसी फिल्मों में रेडियो उद्घोषक की भूमिका भी निभाई। रेडियो प्रसारण में उनके योगदान के लिए उन्हें 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
जब अमीन सयानी ने अमिताभ बच्चन की आवाज़ को ठुकरा दिया
बहुत कम लोग जानते हैं कि जब अमिताभ बच्चन अपने शुरुआती दिनों में ऑल इंडिया रेडियो में ऑडिशन देने गए थे, तो उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था। और उन्हें रिजेक्ट करने वाले कोई और नहीं, बल्कि अमीन सयानी थे। सयानी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस दौरान वह इतने व्यस्त थे कि अमिताभ के ऑडिशन के लिए समय नहीं निकाल पाए, और इस तरह हिंदी सिनेमा को अपना महानायक रेडियो की बजाय फिल्मों में मिला।
अमीन सयानी की विरासत
रेडियो को एक नई पहचान देने वाले अमीन सयानी को आज भी उनकी मधुर आवाज़ और अनोखे अंदाज़ के लिए याद किया जाता है। उन्होंने रेडियो को सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि जन-जन से जुड़ने का माध्यम बनाया। उनकी प्रस्तुतियों ने न केवल भारतीय रेडियो बल्कि संपूर्ण मीडिया जगत को नया आयाम दिया।
आज उनकी पहली पुण्यतिथि पर, पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। उनके योगदान को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि वह सिर्फ एक उद्घोषक नहीं, बल्कि एक संपूर्ण युग थे। उनका जाना रेडियो की दुनिया के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है, लेकिन उनकी यादें और उनका योगदान सदैव अमर रहेगा।