पकी फसल पर बुलडोजर: सींगना ग्राम पंचायत के किसानों का कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-21 15:14:15



 

यमुना खादर क्षेत्र में पकी फसल पर प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाए जाने से आक्रोशित सींगना ग्राम पंचायत के किसानों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि जब फसल की बुवाई की जा रही थी, तब प्रशासन ने कोई रोक-टोक नहीं की, लेकिन अब पकी फसल को नष्ट कर उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया गया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें फसल काटने की मोहलत नहीं दी गई, तो वे सामूहिक आमरण अनशन करेंगे।

प्रशासनिक कार्रवाई और किसानों का आक्रोश

आगरा जिले की सींगना ग्राम पंचायत में यमुना की खादर भूमि पर लगभग 200 से अधिक किसानों ने 100 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू, सरसों और गेहूं की फसल उगाई थी। रविवार को प्रशासन ने अचानक कार्रवाई करते हुए करीब 40 बीघा खड़ी फसल पर बुलडोजर चला दिया, जिससे किसानों में भारी आक्रोश फैल गया। किसानों का कहना है कि जब उन्होंने फसल बोई थी, तब प्रशासन ने कोई आपत्ति नहीं जताई, लेकिन अब पकी फसल को नष्ट कर दिया गया है।

कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन और मांगें

मंगलवार को सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। किसानों ने जिलाधिकारी (डीएम) से मिलने की मांग की, लेकिन डीएम की अनुपस्थिति में उन्होंने अपर जिलाधिकारी (एडीएम) से मुलाकात की। किसानों ने मांग की कि उन्हें फसल काटने की मोहलत दी जाए और भविष्य में ऐसी कार्रवाई न की जाए। किसान नेता चौधरी दिलीप सिंह ने बताया कि पिछले 50 वर्षों से किसान यमुना खादर में खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमारे खेत नदी किनारे थे, जो यमुना की धारा बदलने से नदी में डूब गए। इसलिए जहां जगह मिली, वहां फसल बोई। जब फसल बोई, तब प्रशासन ने नहीं रोका। नीलामी के नाम पर प्रशासन ने पिछले साल हमसे 90 हजार रुपये भी वसूले थे। होली तक फसल कट जाएगी। तब तक हमें मोहलत दी जानी चाहिए।"

प्रशासन की प्रतिक्रिया और भविष्य की रणनीति

एडीएम से मुलाकात के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं और मांगें रखीं, लेकिन समाधान न होने के कारण वे डीएम से मिलने पर अड़े रहे। शाम 5 बजे तक डीएम के न पहुंचने पर किसानों ने विरोध-प्रदर्शन तेज कर दिया। साढ़े पांच बजे किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बुधवार को फिर से कलेक्ट्रेट आएंगे और सामूहिक आमरण अनशन करेंगे।

कानून व्यवस्था और सामाजिक प्रभाव

प्रशासन की इस कार्रवाई से कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई को इस तरह नष्ट करना अन्यायपूर्ण है और इससे उनके परिवारों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय समाज में भी इस घटना को लेकर रोष व्याप्त है और लोग प्रशासन से न्यायसंगत समाधान की मांग कर रहे हैं।

इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन और किसानों के बीच संवादहीनता और समन्वय की कमी को उजागर किया है। आवश्यक है कि प्रशासन और किसान मिलकर समाधान निकालें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके और किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके।


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