महाकुंभ 2025: 60 करोड़ श्रद्धालुओं से 3 लाख करोड़ का व्यापार, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-21 10:20:44

प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित महाकुंभ मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक इंजन भी साबित हो रहा है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार, इस महाकुंभ के दौरान लगभग 60 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन से 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होने का अनुमान है।
अनुमान से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़
प्रारंभिक अनुमानों में महाकुंभ में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई गई थी, जिससे लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के व्यापार की उम्मीद थी। हालांकि, अभूतपूर्व उत्साह और भारी भीड़ के चलते अब यह संख्या 60 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है, जिससे व्यापार का आंकड़ा 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। यह आयोजन, जिसमें बुधवार (19 फरवरी) दोपहर तक 55 करोड़ से अधिक भक्तों की आश्चर्यजनक उपस्थिति देखी गई, दुनिया के सबसे बड़े मानव समारोहों में से एक है। यह वृद्धि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी और व्यापार के नए अवसर सृजित करेगी।
विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार
महाकुंभ के दौरान कई क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
♦आतिथ्य और आवास सेवाएं: होटल, गेस्ट हाउस और अस्थायी टेंट सिटी में बुकिंग में भारी वृद्धि हुई है।
♦खाद्य और पेय पदार्थ: रेस्तरां, ढाबा और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की बिक्री में तेजी आई है।
♦परिवहन और लॉजिस्टिक्स: ट्रेन, बस, टैक्सी और ऑटो रिक्शा सेवाओं की मांग में बढ़ोतरी हुई है।
♦धार्मिक वस्त्र और पूजा सामग्री: धार्मिक वस्त्र, पूजा सामग्री और हस्तशिल्प की बिक्री में उछाल देखा गया है।
♦स्वास्थ्य सेवाएं और वेलनेस सेक्टर: अस्थायी अस्पताल, चिकित्सा शिविर और वेलनेस सेंटर की सेवाओं का विस्तार हुआ है।
♦मीडिया, विज्ञापन और मनोरंजन: मीडिया कवरेज, विज्ञापन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रियता बढ़ी है।
♦टेलीकॉम और तकनीकी सेवाएं: मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट सेवाएं और सुरक्षा उपकरणों की मांग में वृद्धि हुई है।
इन सभी क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और स्थानीय व्यापार को नई ऊंचाइयां मिली हैं।
आसपास के क्षेत्रों पर महाकुंभ का प्रभाव
महाकुंभ का सकारात्मक प्रभाव केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं है। लगभग 150 किलोमीटर के दायरे में स्थित अन्य शहरों और गांवों में भी व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। अयोध्या, वाराणसी, मथुरा और विंध्यवासिनी धाम जैसे धार्मिक स्थलों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
महाकुंभ 2025: एक ऐतिहासिक आयोजन
प्रवीण खंडेलवाल ने महाकुंभ 2025 को न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया, बल्कि इसे राष्ट्रीय और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी माना है। यह आयोजन भारत के व्यापारिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए आने वाले वर्षों के लिए एक नया आर्थिक मानदंड स्थापित करेगा।