फर्जी सीएसआर फंड घोटाला: ईडी की छापेमारी और मुख्य आरोपी आनंदू कृष्णन की गिरफ्तारी
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-20 07:23:35

केरल में एक बड़े फर्जी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई। इस घोटाले में मुख्य आरोपी आनंदू कृष्णन ने आधी कीमत पर लैपटॉप, दोपहिया वाहन और घरेलू उपकरण देने का झांसा देकर लोगों से पैसे ऐंठे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को इस मामले में केरल के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की।
घोटाले का विवरण
आनंदू कृष्णन ने विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और धर्मार्थ संस्थाओं की सीएसआर गतिविधियों के तहत भारी छूट का दावा करते हुए लोगों को आकर्षित किया। उन्होंने स्कूटर, सिलाई मशीन, घरेलू उपकरण और लैपटॉप आधी कीमत पर देने का वादा किया, जिससे लोग उनकी बातों में आ गए। पुलिस के अनुसार, इस घोटाले में ठगी गई कुल राशि लगभग 37 करोड़ रुपये है।
प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई
ईडी ने मंगलवार को केरल में कई स्थानों पर तलाशी ली, जिसमें उन संस्थाओं, ट्रस्टों और व्यक्तियों की तलाश की गई, जिन्होंने आनंदू कृष्णन से पैसे प्राप्त किए थे। इस कार्रवाई का उद्देश्य गरीब लोगों से एकत्र की गई अवैध धनराशि का पता लगाना है। कुछ राजनेताओं, इलेक्ट्रॉनिक डीलरों, ऑटोमोटिव डीलरों, सहकारी बैंकों और एक उर्वरक निर्माण कंपनी की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
पुलिस की जांच और आनंदू कृष्णन की गिरफ्तारी
केरल पुलिस की अपराध शाखा ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली है। इडुक्की जिले के थोडुपुझा निवासी 26 वर्षीय आनंदू कृष्णन को गिरफ्तार किया गया है, जो स्कूटर, सिलाई मशीन, घरेलू उपकरण और लैपटॉप आधी कीमत पर देने का वादा करके लोगों से करोड़ों रुपये ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस इस घोटाले की व्यापक जांच कर रही है, जिसके चलते पूरे राज्य से शिकायतें मिली हैं।
आनंदू कृष्णन: एक संक्षिप्त परिचय
आनंदू कृष्णन, 26 वर्षीय, इडुक्की जिले के थोडुपुझा के निवासी हैं। उन्होंने मुवत्तुपुझा सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट सोसाइटी नामक एक एनजीओ की स्थापना की, जिसके माध्यम से उन्होंने यह घोटाला संचालित किया। कृष्णन ने आक्रामक प्रचार अभियानों के माध्यम से लोगों को आकर्षित किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनके प्रस्तावित उत्पादों पर भारी छूट सीएसआर गतिविधियों का हिस्सा है।
घोटाले का प्रभाव और पीड़ितों की व्यथा
इस घोटाले ने केरल में हजारों लोगों को प्रभावित किया है। कई पीड़ितों ने अपनी जीवन भर की बचत खो दी है। उदाहरण के लिए, नजारक्कल की एक वृद्ध महिला ने बताया कि उन्होंने कृष्णन के कर्मचारियों को 63,000 रुपये का भुगतान किया, लेकिन बदले में उन्हें केवल 3,000 रुपये की एक खराब गुणवत्ता वाली सिलाई मशीन मिली, जो काम भी नहीं करती। इसके अलावा, उन्होंने अपनी बेटी के लिए एक स्कूटर के लिए 60,000 रुपये का भुगतान किया, लेकिन वह राशि भी चली गई।
राजनीतिक संबंधों की जांच
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, केरल के तीन प्रमुख राजनीतिक मोर्चों—सत्तारूढ़ सीपीआई(एम)-नेतृत्व वाले वामपंथी, कांग्रेस-नेतृत्व वाले यूडीएफ, और भाजपा—की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कृष्णन ने दावा किया है कि उन्होंने राजनेताओं को पैसे दिए हैं। इससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है, और सभी दलों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सहकारी बैंकों और अन्य संस्थाओं की भूमिका
इस घोटाले में सहकारी बैंकों, इलेक्ट्रॉनिक और ऑटोमोटिव डीलरों, और एक उर्वरक निर्माण कंपनी की भूमिका भी संदिग्ध है। ईडी और पुलिस इन संस्थाओं के साथ आनंदू कृष्णन के वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वे इस घोटाले में शामिल थे या नहीं।
केरल में फर्जी सीएसआर फंड घोटाला राज्य के इतिहास में सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक के रूप में उभर रहा है। इससे न केवल हजारों लोग आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं, बल्कि राज्य की राजनीति और वित्तीय संस्थाओं की साख पर भी सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियों की तत्परता और विस्तृत जांच से उम्मीद है कि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।