मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर राहुल गांधी का विरोध: आधी रात की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-19 07:31:28

देश के नए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आधी रात को लिए गए इस निर्णय को अपमानजनक और अशिष्ट करार दिया है। राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के खिलाफ बताया है।
नियुक्ति प्रक्रिया पर राहुल गांधी की आपत्ति
राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पत्र साझा करते हुए लिखा, "अगले मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन करने के लिए हुई समिति की बैठक के दौरान मैंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को एक असहमति नोट प्रस्तुत किया था। इसमें कहा गया था कि कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त एक स्वतंत्र चुनाव आयोग का सबसे बुनियादी पहलू चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की प्रक्रिया है।" उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करके और भारत के मुख्य न्यायाधीश को समिति से हटाकर मोदी सरकार ने चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी को लेकर करोड़ों मतदाताओं की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
आधी रात की बैठक पर सवाल
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा आधी रात को नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन का निर्णय लेने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन का आधी रात को निर्णय लेना अपमानजनक और अशिष्टतापूर्ण है, जबकि समिति की संरचना और प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा रही है। इस पर 48 घंटे से भी कम समय में सुनवाई होनी है।"
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक मामला लंबित है। राहुल गांधी ने इस संदर्भ में कहा कि जब इस प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा रही है, तब सरकार का इस तरह से निर्णय लेना न्यायिक प्रक्रिया का अनादर है। उन्होंने कहा, "विपक्ष के नेता के रूप में यह मेरा कर्तव्य है कि मैं बाबासाहब आंबेडकर और हमारे राष्ट्र निर्माताओं के आदर्शों को कायम रखूं और सरकार को जवाबदेह ठहराऊं।"
ज्ञानेश कुमार: नए मुख्य चुनाव आयुक्त
नए मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की गई है। वह 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। ज्ञानेश कुमार ने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया है और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एनवायरमेंटल इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। उन्होंने केरल में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर कार्य किया है, जिसमें एर्नाकुलम के असिस्टेंट कलेक्टर, अडूर के डिप्टी कलेक्टर और कोचीन नगर निगम के म्युनिसिपल कमिश्नर शामिल हैं। केंद्र सरकार में, उन्होंने रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव, गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव, संसदीय कार्य मंत्रालय में सचिव, और सहकारिता मंत्रालय में सचिव के रूप में सेवाएँ दी हैं। वह 31 जनवरी 2024 को सहकारिता सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए और 14 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त हुए।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर या बाहर रखने की कोशिश करके... सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे संवैधानिक संस्थाओं पर अपना नियंत्रण चाहते हैं और विश्वसनीयता नहीं रहने देना चाहते।" कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस प्रक्रिया को संविधान की भावना के खिलाफ बताया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर उठे ये सवाल भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए महत्वपूर्ण हैं। राहुल गांधी और विपक्षी दलों की आपत्तियाँ इस बात की ओर संकेत करती हैं कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आवश्यक है। आगामी दिनों में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई से स्थिति और स्पष्ट होगी।