हिंदी के प्रचार-प्रसार की नई शुरुआत: राजभाषा सम्मेलन में मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री का शक्तिशाली संदेश
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-18 19:14:30

हिंदी भाषा को सरकारी कामकाज में बढ़ावा देने के लिए गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सोमवार को जयपुर में आयोजित संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन ने एक ओर पहल को मजबूती दी है। इस सम्मेलन में मध्य, पश्चिम और उत्तर भारत के राज्यों के प्रतिनिधि एकत्र हुए और हिंदी के महत्व पर जोर दिया। राजस्थान की राजधानी जयपुर ने एक मंच पर हिंदी के प्रचार प्रसार के महत्व को उजागर किया, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने प्रमुख वक्ताओं के रूप में सम्मेलन को संबोधित किया।
हिंदी को सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री का योगदान
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हिंदी को सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सोच और विचारों का वाहक बताया। उन्होंने कहा, "हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।" शर्मा ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी को संघ की राजभाषा माना गया है और अनुच्छेद 351 में इसके प्रचार-प्रसार की बात की गई है।
तकनीकी क्षेत्र में हिंदी का योगदान: एक आवश्यक कदम
सीएम भजनलाल शर्मा ने यह भी कहा कि डिजिटल युग में हिंदी का तकनीकी पक्ष बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कंप्यूटर पर हिंदी में काम करने की नवीनतम तकनीक और सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। उनका कहना था, "हमारी भाषा का डिजिटल दुनिया में प्रभावी रूप से प्रयोग करना हमारी ज़रूरत बन चुकी है।"
हिंदी: एकता और अखंडता की सूत्रधार
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हिंदी भारतीय संस्कृति और सामाजिक व्यवहार को बढ़ावा देने वाली भाषा है, और यह देश की एकता और अखंडता को मजबूत करती है। शर्मा ने यह भी कहा, "हिंदी एक सहज और वैज्ञानिक भाषा है, जो विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।"
राजस्थान में हिंदी का महत्व
राजस्थान में हिंदी को सरकारी कामकाज की प्रमुख भाषा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में कहा, "राजस्थान में हिंदी का व्यापक प्रयोग हो रहा है और इसे बढ़ावा देने के लिए हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं। यह सिर्फ संवैधानिक निर्देश का पालन नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय आवश्यकता भी है।"
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय का संदेश
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने महात्मा गांधी के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि "राजभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है।" राय ने हिंदी को देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक अपेक्षाओं को पूरा करने वाली भाषा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने में मदद करती है और यही लोकतंत्र की सफलता की कुंजी है।
सांस्कृतिक विविधता और हिंदी का संगम
राय ने राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता का भी उल्लेख किया और कहा कि "राजस्थान की पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता और आतिथ्य सत्कार से है। यहां के लोग अपनी परंपराओं में गहरी आस्था रखते हैं, और यही कारण है कि जयपुर जैसे ऐतिहासिक शहर में हिंदी का प्रचार-प्रसार और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।"
सम्मेलन में भागीदारों की संख्या
जयपुर के जेईसीसी में आयोजित इस सम्मेलन में 16 प्रदेशों के कुल 3500 प्रतिनिधि उपस्थित थे, जिसमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, दमण दीव, दादरा और नागर हवेली के लोग शामिल थे।
पुरस्कार वितरण: हिंदी के प्रचार में योगदान
सम्मेलन के दौरान उन विभागों और उनके प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने सरकारी दफ्तरों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 110 विभागों को उनकी उत्कृष्टता के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए।
उप मुख्यमंत्री और सांसद की उपस्थिति
सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और जयपुर सांसद मंजू शर्मा भी उपस्थित थीं। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया।
यह सम्मेलन न केवल हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता को भी बढ़ावा देने का माध्यम बन गया। हिंदी अब न केवल एक भाषा है, बल्कि यह भारतीय समाज और संस्कृति को सशक्त करने वाली शक्ति बन चुकी है।