जिला अभिभाषक संघ का शपथ ग्रहण समारोह: सस्ते और सुलभ न्याय के साथ संतुलन भी जरूरी –न्यायाधिपति उमाशंकर व्यास


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-18 16:16:20



 

राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति उमाशंकर व्यास ने शनिवार को दौसा में जिला अभिभाषक संघ के शपथ ग्रहण समारोह में महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि आमजन को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। न्यायिक अधिकारी अतिरिक्त समय देकर मामलों का निपटारा कर रहे हैं, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक बनी नहीं रह सकती, क्योंकि इससे उनकी व्यक्तिगत जिंदगी प्रभावित हो सकती है।

बार और बेंच के समन्वय से मिलेगा पीड़ितों को न्याय

न्यायाधिपति उमाशंकर व्यास ने वकीलों और न्यायपालिका के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अगर बार और बेंच के बीच तालमेल बेहतर होगा, तो मुवक्किलों को त्वरित न्याय मिल सकेगा। उन्होंने वकीलों को भी न्याय प्रक्रिया में सहयोगी बनने की सलाह दी।

शपथ ग्रहण समारोह में ली शपथ

दौसा जिला अभिभाषक संघ के कोर्ट परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के सदस्यों को शपथ दिलाई गई। इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार सहित जिले के सभी न्यायिक अधिकारी और वकील मौजूद रहे।

नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के सदस्य

शपथ ग्रहण समारोह में निम्नलिखित पदाधिकारियों ने कार्यभार संभाला:

अध्यक्ष: कुंजबिहारी शर्मा

सचिव: विजेंद्र सिंह चेची

कोषाध्यक्ष: मनोहर मुद्गल

वरिष्ठ उपाध्यक्ष: रविंद्र सिंह बैंसला

उपाध्यक्ष: श्रीराम मीना

संयुक्त सचिव: अंकित शर्मा

पुस्तकालय सचिव: निखिल मोहन शर्मा

सांस्कृतिक सचिव: राजेंद्र अन्दाना

कार्यकारिणी सदस्य: जितेंद्र कुमार गंगावत, हनीस अली, राजेंद्र प्रसाद जागिंड, सीताराम दायमा, बादल सिंह बैरवा, महेंद्र कुमार सैन, महेश कुमार जागिंड

समारोह में हुआ मां सरस्वती का पूजन

समारोह की शुरुआत में अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित किया। इस दौरान अभिभाषक संघ के अध्यक्ष कुंजबिहारी शर्मा ने वकीलों के हितों के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। वहीं, संघ के सचिव विजेंद्र सिंह चेची ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

न्याय प्रणाली में संतुलन जरूरी

न्यायाधिपति उमाशंकर व्यास ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि न्याय प्रणाली का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। न्यायाधीशों पर बढ़ता कार्यभार उनके निजी जीवन को भी प्रभावित कर सकता है, इसलिए बार और बेंच को मिलकर ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करनी होगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया सुचारू रूप से चले और न्यायाधीशों पर अनावश्यक दबाव न बने।

दौसा में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में न्यायाधिपति उमाशंकर व्यास का संदेश स्पष्ट था कि न्याय प्रक्रिया में सुधार जरूरी है, लेकिन इसके लिए बार और बेंच के बीच समन्वय भी आवश्यक है। न्यायपालिका को अधिक भार से बचाने और न्यायाधीशों की व्यक्तिगत जिंदगी पर असर न पड़े, इसके लिए न्यायिक अधिकारियों और वकीलों को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।


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