हिमाचल के थिरोट महिला मंडल की नशे के खिलाफ अनोखी पहल: पकड़े जाने पर लगेगा एक लाख रुपये जुर्माना
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-18 16:14:04

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में नशे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए थिरोट महिला मंडल ने एक साहसिक और अनुकरणीय कदम उठाया है। नशे के खिलाफ संघर्ष में महिलाओं की यह पहल न केवल समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करेगी, बल्कि नशे के कारोबारियों और उपभोक्ताओं के लिए एक कड़ा संदेश भी होगी।
महिला मंडल का सख्त निर्णय: नशे पर लगेगा भारी जुर्माना
थिरोट पंचायत में आयोजित एक बैठक में महिला मंडल की अध्यक्ष राम देवी की अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया कि यदि कोई व्यक्ति—चाहे वह स्थानीय हो या बाहरी—चिट्टा, चरस या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करता या बेचता हुआ पकड़ा जाता है, तो उस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, उसके खिलाफ पुलिस में मामला भी दर्ज कराया जाएगा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य नशे के प्रसार को रोकना और युवाओं को इस घातक लत से बचाना है।
अवैध वन कटान के खिलाफ पूर्व की सफल मुहिम
यह पहली बार नहीं है जब थिरोट महिला मंडल ने सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता दिखाई है। इससे पहले, उन्होंने अवैध वन कटान के खिलाफ मुहिम छेड़ी थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 10,000 रुपये का पुरस्कार भी मिला था। इस सफलता ने महिला मंडल को और भी प्रोत्साहित किया है कि वे समाजहित में ऐसे कदम उठाते रहें।
बेटा-बेटी समानता और पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका
लाहौल-स्पीति जिले में बेटा और बेटी को समान दृष्टि से देखा जाता है। प्यूकर गांव में बेटी के जन्म को बेटे की तरह ही धूमधाम से मनाया जाता है, जो समाज में लैंगिक समानता की मिसाल पेश करता है। साथ ही, यहां के महिला मंडल अपने क्षेत्र के जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है।
पुलिस प्रशासन की सराहना और समर्थन
केलांग के पुलिस उपाधीक्षक राज कुमार ने थिरोट महिला मंडल की इस पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि नशे को रोकने में जागरूकता सबसे प्रभावी साधन है, और महिलाओं की यह सक्रियता समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद करेगी। पुलिस प्रशासन ने भी इस मुहिम में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
थिरोट महिला मंडल की यह पहल नशे के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल नशे के कारोबारियों और उपभोक्ताओं में भय पैदा होगा, बल्कि समाज में जागरूकता भी बढ़ेगी। अन्य क्षेत्रों के लिए भी यह एक प्रेरणास्पद उदाहरण है कि कैसे सामुदायिक स्तर पर संगठित होकर सामाजिक बुराइयों का मुकाबला किया जा सकता है।