सोलन के मशरूम अनुसंधान निदेशालय ने एकत्रित किए 4,092 जर्मप्लाज्म: किसानों और वैज्ञानिकों के लिए नई संभावनाएँ
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-18 07:24:23

हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित मशरूम अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) ने देशभर से 4,092 मशरूम जर्मप्लाज्म एकत्रित किए हैं, जो किसानों, विश्वविद्यालयों और मशरूम फार्मों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही, निदेशालय जहरीले और खाने योग्य मशरूम की पहचान में भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने निदेशालय के निरीक्षण के दौरान यह जानकारी साझा की।
जर्मप्लाज्म एकत्रीकरण और संरक्षण
डीएमआर पिछले कई वर्षों से विभिन्न स्थानों से विभिन्न किस्मों के मशरूम एकत्रित कर रहा है। निदेशालय के निदेशक डॉ. वी.पी. शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश से ही 500 प्रकार के जंगली मशरूम एकत्रित किए गए हैं, जिन पर शोध कार्य प्रारंभ हो चुका है। इन जर्मप्लाज्म को ठंडे और गर्म तापमान में सुरक्षित रखा गया है, ताकि उनके गुणों का अध्ययन कर किसानों और वैज्ञानिकों को लाभान्वित किया जा सके।
जहरीले और खाने योग्य मशरूम की पहचान
विश्वभर में मशरूम की लगभग 14,000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से लगभग 3,000 प्रजातियाँ ही खाने योग्य हैं। डीएमआर के विशेषज्ञ इन जंगली मशरूमों पर शोध कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन सी प्रजातियाँ खाने योग्य हैं और कौन सी जहरीली। अमानिटा प्रजाति की मशरूम सबसे अधिक जहरीली होती है, जिसका सेवन करने से 24 घंटे के भीतर मनुष्य की मृत्यु हो सकती है। अन्य जहरीली मशरूमों के सेवन से पेट दर्द, दस्त, उल्टी और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। वहीं, किंग बोलीट, पाइन मशरूम, गुच्छी मशरूम, सीप मशरूम और सल्फर शेल्फ मशरूम सबसे अधिक खाए जाने वाले जंगली मशरूमों में शामिल हैं।
मशरूम की शेल्फ-लाइफ बढ़ाने पर शोध
महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने निदेशालय के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अब मशरूम की शेल्फ-लाइफ बढ़ाने पर भी शोध किया जाएगा, जिससे उत्पादकों को अधिक लाभ मिलेगा। वर्तमान में, कई मशरूम जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे किसानों को नुकसान होता है। इस दिशा में शोध कार्य से मशरूम की भंडारण क्षमता बढ़ेगी और बाजार में उनकी उपलब्धता लंबे समय तक बनी रहेगी।
किसानों के लिए प्रशिक्षण और सुविधाएँ
डीएमआर देशभर के किसानों और मशरूम उत्पादकों के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कर रहा है, ताकि वे आधुनिक तकनीकों और नवीनतम शोध से अवगत हो सकें। निदेशालय में 33 बेड का नवनिर्मित किसान होस्टल भी स्थापित किया गया है, जिसका नाम 'भारत रत्न एम.एस. स्वामीनाथन किसान अतिथिगृह' रखा गया है। इस होस्टल का उद्घाटन महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने किया, जिससे प्रशिक्षण के लिए आने वाले किसानों को आवास की सुविधा मिलेगी।
कीड़ाजड़ी मशरूम का प्रशिक्षण
निदेशक डॉ. वी.पी. शर्मा ने बताया कि निदेशालय एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाली कीड़ाजड़ी मशरूम का प्रशिक्षण भी किसानों को प्रदान कर रहा है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और वे उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती के लिए प्रेरित होंगे।
सोलन स्थित मशरूम अनुसंधान निदेशालय का यह प्रयास किसानों, वैज्ञानिकों और मशरूम उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। जर्मप्लाज्म एकत्रीकरण, जहरीले और खाने योग्य मशरूम की पहचान, शेल्फ-लाइफ बढ़ाने पर शोध और किसानों के लिए प्रशिक्षण जैसी पहलों से मशरूम उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय में सुधार होगा।