नेपाल से आए 85 वर्षीय श्रद्धालु को इस्केमिक स्ट्रोक, एसआरएन अस्पताल के चिकित्सकों ने बचाई जान


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-17 20:44:35



 

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के दौरान नेपाल से आए 85 वर्षीय श्रद्धालु रामधनी को अचानक इस्केमिक स्ट्रोक हुआ। स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन अस्पताल) के वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ. कमलेश सोनकर और उनकी टीम ने तत्परता दिखाते हुए उनकी जान बचाई। परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और चिकित्सकों का आभार व्यक्त किया है।

नेपाल से महाकुंभ की यात्रा

नेपाल के लुंबिनी निवासी रामधनी महाकुंभ में मौनी बाबा आश्रम, शांति कुटिया में एक माह से राम नाम का जाप कर रहे थे। 14 फरवरी की रात को अचानक उन्हें दाहिने हिस्से में कमजोरी, बोलने में कठिनाई और हल्की बेहोशी महसूस हुई। परिजनों ने तुरंत उन्हें एसआरएन अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया।

चिकित्सकों की तत्परता और उपचार

एसआरएन अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ. कमलेश सोनकर ने बताया कि मरीज की सीटी स्कैन और अन्य आवश्यक जांचें की गईं, जिससे पता चला कि उन्हें इस्केमिक स्ट्रोक हुआ है। समय पर उपचार न मिलने पर यह स्थिति घातक हो सकती थी। डॉ. सोनकर और उनकी टीम ने तुरंत थ्रॉम्बोलाइसिस प्रक्रिया शुरू की, जिससे ब्लॉकेज हटाया गया और मरीज की हालत में सुधार हुआ।

अस्पताल की सुविधाओं में सुधार

एसआरएन ट्रॉमा सेंटर के सह-नोडल अधिकारी डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए अस्पताल की सुविधाओं में लगातार सुधार किया गया है। इससे तीर्थयात्रियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारी टीम हर समय तत्पर है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्रदान की जा सके।

परिजनों का आभार

रामधनी की बेटी रीता ने बताया कि उनके पिता की जान बचाने में एसआरएन अस्पताल के चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा, "हम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और एसआरएन अस्पताल के डॉ. कमलेश सोनकर, डॉ. प्रभात सिंह, डॉ. अर्चना ओझा, डॉ. संदीप, डॉ. सुजीत, डॉ. तेज प्रताप और पूरी न्यूरोलॉजी टीम के आभारी हैं, जिनकी कुशलता और तत्परता के कारण मेरे पिता को नया जीवन मिला है।"

महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन के दौरान एसआरएन अस्पताल की चिकित्सा टीम ने अपनी तत्परता और कुशलता से एक वृद्ध श्रद्धालु की जान बचाकर सराहनीय कार्य किया है। इससे न केवल मरीजों और उनके परिजनों का विश्वास बढ़ा है, बल्कि अस्पताल की सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रमाणित हुई है।


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