बाड़मेर में पांच मुमुक्षुओं की दीक्षा: सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम पथ की ओर अग्रसर
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-17 18:46:21

राजस्थान के बाड़मेर में आज एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन के तहत पांच मुमुक्षु—अक्षय मालू, भावना संखलेचा, आरती बोथरा, निशा बोथरा और साक्षी सिंघवी—सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम पथ अपना रहे हैं। इस अवसर पर कुशल वाटिका में दीक्षा समारोह आयोजित किया गया है, जहां खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में यह दीक्षा संपन्न हो रही है।
वर्षीदान वरघोड़ा शोभायात्रा: दान और उत्साह का संगम
दीक्षा महोत्सव के पंचान्हिका कार्यक्रम के चौथे दिन, शनिवार को वर्षीदान वरघोड़ा शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस दौरान मुमुक्षुओं ने सांसारिक वस्तुओं का दान किया, जिसमें वस्त्र, अनाज और अन्य उपयोगी सामग्री शामिल थी। शोभायात्रा में हाथी, घोड़े, बैंड-बाजे और ढोल की गूंज के साथ पुरुषों और महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर भाग लिया। शहर की विद्यापीठ से प्रारंभ होकर यह शोभायात्रा मुख्य मार्गों से होती हुई पुनः विद्यापीठ पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हुई। इस अवसर पर जैन समाज में भारी उत्साह देखा गया।
मुमुक्षुओं का आत्मकल्याण की ओर कदम
आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने बताया कि ये पांचों युवा संयम पथ को अपनाकर आत्मकल्याण की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "16 फरवरी को ये सभी मुमुक्षु दीक्षित होंगे और परमात्मा मुनिसुव्रत स्वामी एवं दादा गुरुदेव की साक्षी में नवजीवन की शुरुआत करेंगे।" इस निर्णय पर मुमुक्षुओं ने अपनी खुशी और संतोष व्यक्त किया है।
नवनिर्मित मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा
आज प्रातः शुभ मुहूर्त में नवनिर्मित मोक्षमार्ग स्थित मंदिर में पहले तीर्थंकर परमात्मा की पाषाण प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इस पावन अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मिलित हुए। प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात कुशल वाटिका में दीक्षा समारोह आयोजित किया जा रहा है।
दीक्षा समारोह का सीधा प्रसारण
इस महोत्सव का सीधा प्रसारण भी किया जा रहा है, ताकि जो श्रद्धालु व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, वे ऑनलाइन माध्यम से इस पावन अवसर का लाभ उठा सकें। इससे देश-विदेश में बसे जैन समुदाय के लोग भी इस धार्मिक आयोजन से जुड़ पा रहे हैं।
बाड़मेर में आयोजित यह दीक्षा महोत्सव न केवल जैन समाज के लिए, बल्कि समस्त समाज के लिए एक प्रेरणास्पद उदाहरण है। युवा मुमुक्षुओं का सांसारिक सुखों का त्याग कर संयम पथ अपनाना आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस आयोजन से समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।