स्नातक छात्र की निर्मम हत्या का मामला: 11 दोषियों को उम्रकैद
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-17 18:39:37

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के खैर तहसील के लोहागढ़ गांव में छह वर्ष पूर्व घटित एक हृदयविदारक घटना में स्नातक छात्र लाखन की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अदालत ने 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
घटना का विवरण
28 जून 2019 को दोपहर एक बजे, लोहागढ़ निवासी हरपाल सिंह के पुत्र लाखन अपने खेत में ज्वार की फसल की रखवाली कर रहे थे। उसी समय, गांव के कुछ लोग लाठी-डंडों से लैस होकर वहां पहुंचे और लाखन पर हमला कर दिया। शोर सुनकर पहुंचे परिजनों ने लाखन को बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण लाखन की मृत्यु हो गई।
हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी
मुकदमे में महेंद्र, उनके भाई रामदत्त, भतीजे देवेंद्र उर्फ देवो, भांजे राजेंद्र, पड़ोसी पूरन सिंह, ओमवीर, तथा सगे भाई अतुल और रवेंद्र को नामजद किया गया। पुलिस जांच में ओमवीर की पत्नी शकुंतला और महेंद्र की बहनें लता-गीता के नाम भी सामने आए। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और चार्जशीट दाखिल की गई।
हत्या का कारण: दोस्ती से रंजिश
मृतक लाखन की भाभी की गवाही के अनुसार, लाखन की दोस्ती आरोपियों के परिवार की एक युवती से थी, जिसे उनका परिवार स्वीकार नहीं कर रहा था। इस दोस्ती के विरोध में, आरोपियों ने लाखन की हत्या की योजना बनाई और उसे खेत में अकेला पाकर घेरकर मार डाला। अदालत ने इसी रंजिश को हत्या का मुख्य कारण माना है।
हत्या की निर्ममता
लाखन की हत्या अत्यंत क्रूरता से की गई थी। हमलावरों ने लाखन के निजी अंगों में रॉड डाल दी थी। लाखन ने अपनी मामी के घर में छिपकर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने घर में घुसकर उसे बेरहमी से पीटा। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया था, और दो दिनों तक सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया गया था।
न्यायालय का फैसला
अलीगढ़ के एडीजे-छह नवल किशोर सिंह की अदालत ने सभी 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही प्रत्येक पर 35,000 रुपये का अर्थदंड लगाया है। इस राशि का 50% पीड़ित परिवार को देने का आदेश दिया गया है। दोषियों में युवती के पिता, परिजन और पड़ोसी शामिल हैं।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
दोषियों को सजा मिलने के बाद, लाखन के पिता हरपाल सिंह ने कहा, "यह सच है कि मेरा बेटा वापस नहीं आ सकता, लेकिन कम से कम अदालत ने दोषियों को उनके किए की सजा दी है।" लाखन हरपाल का सबसे छोटा बेटा था, और परिवार को उम्मीद थी कि वह पढ़-लिखकर कुछ बड़ा करेगा। खेती और मजदूरी के सहारे परिवार पाल रहे हरपाल के लिए यह एक बड़ी क्षति है।
अभियोजन पक्ष की जानकारी
एडीजीसी जेपी राजपूत ने बताया कि मुकदमे में दो चरणों में चार्जशीट दाखिल की गई थी। एक में 2020 और दूसरे में 2021 में आरोप तय हुए। फिर दोनों पत्रावलियों को एक किया गया। कुल 9 गवाह पेश किए गए, जिनमें वादी, मृतक की भाभी, एक अन्य महिला, दो चिकित्सक, एसआई, दो विवेचक एसएचओ, और मुकदमा लेखक शामिल थे।
अदालत की कार्यवाही
15 फरवरी को लंच के बाद पत्रावली पेश की गई। सभी आरोपी अदालत में उपस्थित थे। तीन बजे के बाद सुनवाई करते हुए अदालत ने सभी को अभिरक्षा में लेने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस की सक्रियता बढ़ गई, और सुरक्षा के बीच सभी को जेल पहुंचाया गया। जेल में सभी को निगरानी में रखा गया है।
इस घटना ने समाज में व्याप्त जातिगत और पारिवारिक रंजिशों की भयावहता को उजागर किया है। न्यायालय का यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए कुछ हद तक सांत्वना प्रदान करता है, लेकिन यह भी दर्शाता है कि समाज में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।