बेट द्वारका में जल-थल रक्षा 2025 सैन्य अभ्यास: तटीय सुरक्षा में नया आयाम
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-17 10:02:56

गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित बेट द्वारका में हाल ही में 'जल-थल रक्षा 2025' नामक एक व्यापक सैन्य अभ्यास आयोजित किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना और रणनीतिक द्वीपों की रक्षा सुनिश्चित करना था। इसमें भारतीय सेना, तटरक्षक बल, और समुद्री पुलिस सहित विभिन्न एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी की।
अभ्यास का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
बेट द्वारका और उसके आसपास के द्वीपों की सुरक्षा में हाल के दिनों में अवैध अतिक्रमण और संभावित खतरों की घटनाएं सामने आई हैं। इन चुनौतियों से निपटने और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 'जल-थल रक्षा 2025' अभ्यास का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना और आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था।
भाग लेने वाली इकाइयाँ
इस महत्वपूर्ण अभ्यास में कई प्रमुख इकाइयों ने हिस्सा लिया:
11 इन्फैंट्री डिवीजन (अहमदाबाद): भारतीय सेना की यह इकाई तटीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
31 इन्फैंट्री ब्रिगेड (जामनगर): यह ब्रिगेड तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों के लिए जानी जाती है।
भारतीय तटरक्षक बल: समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और निगरानी में प्रमुख भूमिका निभाने वाला बल।
समुद्री पुलिस: स्थानीय जलक्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली इकाई।
अभ्यास की प्रमुख गतिविधियाँ
अभ्यास के दौरान कई महत्वपूर्ण गतिविधियाँ आयोजित की गईं:
होवरक्राफ्ट के माध्यम से तट पर तैनाती:
सुरक्षा कर्मियों ने होवरक्राफ्ट का उपयोग करके तट पर तेजी से तैनाती की, जिससे आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।
महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा:
अभ्यास में महत्वपूर्ण स्थलों की सुरक्षा और संभावित खतरों से निपटने के लिए रणनीतियाँ विकसित की गईं।
अंतर-एजेंसी समन्वय:
विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए संयुक्त अभियानों का संचालन किया गया।
अधिकारियों के बयान
सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल अमोल अवाटे ने अभ्यास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "द्वारका और उसके आसपास के द्वीपों की सुरक्षा और हाल ही में हुए अवैध अतिक्रमण को ध्यान में रखते हुए, भारतीय सेना ने 'जल-थल रक्षा 2025' अभ्यास का आयोजन किया। इसमें 11 अहमदाबाद, 31 जामनगर, भारतीय तटरक्षक और समुद्री पुलिस ने भाग लिया।" उन्होंने आगे कहा, "इस अभ्यास की निगरानी देवभूमि द्वारका के जिला प्रशासन, वन विभाग, गुजरात मैरीटाइम बोर्ड, और एनएसजी द्वारा की गई। अभ्यास के दौरान, यह सुनिश्चित किया गया कि आतंकवादी हमले या युद्ध के दौरान सरकारी विभागों, अर्धसैनिक बलों, और रक्षा बलों के बीच किस तरह का समन्वय होना चाहिए।"
अन्य संबंधित अभ्यास
इससे पहले, भारतीय सेना ने 'विंग्ड रेडर' नामक एक व्यापक प्रशिक्षण अभ्यास में भाग लिया था, जिसमें विशेष हवाई अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस अभ्यास में उच्च स्तर की परिचालन तत्परता और अंतर-सेवा समन्वय का प्रदर्शन किया गया। एक विज्ञप्ति के अनुसार, "अभ्यास में फिक्स्ड-विंग और रोटरी-विंग दोनों विमानों से विभिन्न हवाई प्रविष्टि तकनीकों का पूर्वाभ्यास शामिल था, जिससे भाग लेने वाले कर्मियों के कौशल में वृद्धि हुई।"
'जल-थल रक्षा 2025' अभ्यास ने तटीय सुरक्षा को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे अभ्यास न केवल हमारी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि संभावित खतरों से निपटने के लिए हमारी तैयारियों को भी परखते हैं। भविष्य में भी इस तरह के संयुक्त अभ्यासों की आवश्यकता बनी रहेगी, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके।