नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर महाकुंभ जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ हुई बेकाबू, भगदड़ में 18 की मौत, कई घायल
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-17 07:54:21

शनिवार रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जो हुआ, वह एक भयावह त्रासदी थी। महाकुंभ में स्नान के लिए प्रयागराज जाने वाले हजारों श्रद्धालु स्टेशन पर उमड़ पड़े, जिससे प्लेटफॉर्म नंबर 14 और 15 पर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। ट्रेन पकड़ने की अफरा-तफरी में भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई, जिसमें 18 यात्रियों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हो गए।
घटना के तुरंत बाद, रेलवे प्रशासन, एनडीआरएफ, दमकल विभाग और पुलिस की टीमें बचाव कार्य में जुट गईं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हादसे पर दुख व्यक्त किया और जांच के आदेश दिए।
हादसे की पूरी कहानी: कैसे बेकाबू हुई भीड़
शनिवार और रविवार की छुट्टी के चलते हजारों यात्री प्रयागराज जाने के लिए स्टेशन पहुंचे। रेलवे प्रशासन को उम्मीद नहीं थी कि भीड़ इतनी अधिक होगी। प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर प्रयागराज एक्सप्रेस खड़ी थी। स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस और भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस भी देरी से चल रही थीं। इन ट्रेनों के यात्री भी प्लेटफॉर्म नंबर 12, 13 और 14 पर खड़े थे। अचानक ट्रेन की घोषणा हुई, और लोग भागते हुए ट्रेन तक पहुंचने की कोशिश करने लगे।
इस अफरा-तफरी के कारण लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने लगे। सीढ़ियों, एस्केलेटर और फुटओवर ब्रिज पर भी भीड़ बढ़ गई। घुटन और धक्का-मुक्की के कारण यात्री गिरने लगे। स्टेशन पर तैनात सुरक्षाकर्मी भीड़ को संभालने में असमर्थ दिखे।
चश्मदीदों की आंखों देखी: "सबकुछ बर्बाद हो गया!"
योगेश मिश्र अपने परिवार के साथ प्रयागराज जाने के लिए स्टेशन पहुंचे थे। भगदड़ में उनकी पत्नी और बेटी बिछड़ गए। रोते हुए उन्होंने कहा कि उनका बेटा उनके साथ है, लेकिन उनकी पत्नी और बेटी कहां हैं, इसका कुछ पता नहीं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि कहां जाएं और किससे पूछें।
बिमला देवी का परिवार भी इस हादसे का शिकार हुआ। उन्होंने बिलखते हुए बताया कि उनके पति हृदयरोगी हैं, और उन्होंने उन्हें आखिरी बार रात 10 बजे देखा था। उसके बाद से कोई संपर्क नहीं हुआ। वह नहीं जानतीं कि वे जीवित हैं या नहीं।
संगम विहार के श्रद्धालु परिवार ने बताया कि वे एक घंटे तक भीड़ में फंसे रहे। ऐसा लगा कि दम घुट जाएगा और वे बच नहीं पाएंगे। शुक्र है कि किसी तरह उनकी जान बच गई।
मृतकों और घायलों की संख्या: अस्पताल की रिपोर्ट
लोकनायक अस्पताल की आपातकालीन विभाग प्रमुख डॉ. ऋतु सक्सेना ने बताया कि 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 11 महिलाएं और 3 बच्चे शामिल हैं। लेडी हार्डिंग अस्पताल में 2 और मौतें हुईं। 20 से अधिक घायलों का इलाज जारी है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
प्रशासन पर उठे सवाल: "आखिर सुरक्षा के इंतजाम कहां थे?"
प्रत्यक्षदर्शियों और यात्रियों के अनुसार, स्टेशन पर पुलिस बल की भारी कमी थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं थे। स्टेशन पर पैदल चलने तक की जगह नहीं थी, फिर भी भीड़ को रोका नहीं गया। रेलवे ने इतनी भीड़ के बावजूद अतिरिक्त ट्रेनें क्यों नहीं चलाईं, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
रेल मंत्री का बयान और मुआवजे की घोषणा
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेल प्रशासन यात्रियों की हर संभव मदद कर रहा है और घटना की उच्चस्तरीय जांच की जाएगी। वैष्णव ने एक्स पर कहा कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण भगदड़ से बहुत दुखी हूं। मेरी प्रार्थनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। पूरी टीम उन सभी लोगों की सहायता करने के लिए काम कर रही है जो इस दुखद घटना से प्रभावित हुए हैं।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दुख जताया है। राष्ट्रपति के ऑफिस ने एक्स पर लिखा, "नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में लोगों की मौत के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ है। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।" हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल्ली के उपराज्यपाल व विपक्ष के कई नेताओं ने दुख जताया है।
इसी बीच हादसे के शिकार पीड़ितों के लिए सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया है। जिसके अनुसार मृतकों के परिजनों को 10 लाख, गंभीर रूप से घायल लोगों को 2.5 लाख और मामूली रूप से घायल लोगों को 1.0 लाख का मुआवजा दिया जाएगा।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि यह सरकार और रेलवे की नाकामी का एक और उदाहरण है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम क्यों नहीं किए गए। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कहा कि रेलवे के कुप्रबंधन की वजह से इतनी जानें गई हैं। त्योहारों में अतिरिक्त ट्रेनें क्यों नहीं चलाई गईं।
राहत और बचाव कार्य
सूचना पर एनडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर राहत कार्य में जुट गई। दमकल विभाग ने चार गाड़ियों के साथ घायलों को अस्पताल पहुंचाया। रेलवे प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए।
दमकल विभाग के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि रात 9:55 बजे प्लेटफॉर्म नंबर 14-15 पर भगदड़ की सूचना मिली थी। उनकी टीम ने तुरंत कार्रवाई की।
ये हुए भगदड़ के शिकार
भगदड़ के शिकार लोगों की प्रशासन द्वारा लिस्ट जारी कर दी गई है. जिसके अनुसार मृतकों की पहचान आहा देवी (79 वर्ष) पत्नी रविन्दी नाथ निवासी बक्सर, पूनम देवी (40 वर्ष) पत्नी मेघनाथ निवासी सारण, ललिता देवी (35 वर्ष) पत्नी संतोष निवासी परना, सुरुचि पुत्री (11 वर्ष) मनोज शाह निवासी मुजफ्फरपुर, कृष्णा देवी (40 वर्ष) पत्नी विजय शाह निवासी समस्तीपुर, विजय साह (15 वर्ष) पुत्र राम सरूप साह निवासी समस्तीपुर, नीरज (12 वर्ष) पुत्र इंद्रजीत पासवान निवासी वैशाली, शांति देवी (40 वर्ष) पत्नी राज कुमार मांझी निवासी नवादा, पूजा कुमार (8 वर्ष) पुत्री राज कुमार मांझी निवासी नवादा. ये सभी लोग बिहार के रहने वाले हैं. इसके अलावा हादसे में दिल्ली के 8 लोगों की भी मौत हुई है. जिनमें पिंकी देवी (41 वर्ष) पत्नी उपेन्द्र शर्मा निवासी संगम विहार, शीला देवी (50 वर्ष) पत्नी उमेश गिरी निवासी सरिता विहार, व्योम (25 वर्ष) पुत्र धर्मवीर निवासी बवाना, पूनम (34 वर्ष) पत्नी वीरेंद्र सिंह निवासी महावीर एन्क्लेव, ममता झा (40 वर्ष) पत्नी विपिन झा निवासी नांगलोई, रिया सिंह (7 वर्ष) पुत्री ओपिल सिंह निवासी सागरपुर, बेबी कुमारी (24 वर्ष) पुत्री प्रभु साह निवासी बिजवासन, मनोज (47 वर्ष) पुत्र पंचदेव कुशवाह निवासी नांगलोई. ये सभी लोग दिल्ली के रहने वाले साथ थे. जबकि एक अन्य की पहचान संगीता मलिक (34 वर्ष) पत्नी मोहित मलिक निवासी भिवानी, हरियाणा के रूप में हुई है.
क्या यह हादसा रोका जा सकता था?
अगर रेलवे प्रशासन ने अतिरिक्त ट्रेनें चलाई होतीं, तो भीड़ इतनी अधिक नहीं होती। अगर स्टेशन पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात होता, तो भगदड़ रोकी जा सकती थी। अगर यात्री व्यवस्थित तरीके से प्लेटफॉर्म पर प्रवेश करते, तो हादसा नहीं होता। अब सवाल यह है कि क्या रेलवे इस हादसे से सबक लेगा।
प्रशासन को लेनी होगी सीख
यह हादसा हमें सिखाता है कि भीड़ प्रबंधन की सही योजना और प्रशासनिक तत्परता के बिना ऐसे हादसे भविष्य में भी हो सकते हैं। रेलवे और पुलिस को मिलकर त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।