जीएसटी में ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू: कर चोरी पर लगेगी लगाम


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-16 17:08:06



 

भारत सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और कर चोरी रोकने के लिए ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इस प्रणाली के माध्यम से उत्पादन उद्योगों में उत्पादों की निगरानी की जाएगी, जिससे कर चोरी पर अंकुश लगेगा। यह बातें प्रमुख चार्टर्ड एकाउंटेंट जीडी दुबे ने वाराणसी में आयोजित बजट चर्चा में कहीं। द स्मॉल इंडस्ट्री एसोसिएशन व इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन की ओर से आयोजित बजट चर्चा में सीए जीडी दुबे ने जीएसटी में आए विभिन्न प्रकार के नए टैक्सेशन, टीडीएस एवं टीसीएस के क्षेत्र में बदलाव एवं नियमों की जानकारी दी। 

ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली: क्या है और कैसे काम करेगी

ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली के तहत, कर चोरी की संभावना वाले उत्पादों या उनके पैकेज पर एक विशिष्ट पहचान चिह्न (यूनीक आइडेंटिफिकेशन मार्किंग) लगाया जाएगा। यह चिह्न उत्पाद की आपूर्ति श्रृंखला में उसके प्रत्येक चरण का पता लगाने में मदद करेगा, जिससे कर अधिकारियों को वास्तविक उत्पादन और बिक्री की जानकारी प्राप्त होगी। इससे कर चोरी की संभावनाएं कम होंगी और कर संग्रहण में वृद्धि होगी। 

जीएसटी परिषद की बैठक: महत्वपूर्ण निर्णय

दिसंबर 2024 में आयोजित 55वीं जीएसटी परिषद की बैठक में इस प्रणाली को मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कर चोरी रोकने के लिए 'ट्रैक एंड ट्रेस' प्रणाली को लागू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इस प्रणाली के तहत, कर चोरी की संभावना वाले उत्पादों पर विशिष्ट पहचान चिह्न लगाया जाएगा, जिससे उनकी आपूर्ति श्रृंखला में निगरानी संभव हो सकेगी। 

उद्योगों पर प्रभाव: लाभ और चुनौतियाँ

इस नई प्रणाली के लागू होने से उद्योगों को अपने उत्पादों की पारदर्शिता बढ़ानी होगी। हालांकि, इससे कर चोरी में कमी आएगी और सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी। उद्योगों को अपने उत्पादन और वितरण प्रक्रियाओं में आवश्यक बदलाव करने होंगे, जिससे प्रारंभिक चरण में कुछ चुनौतियाँ आ सकती हैं। लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह प्रणाली उद्योगों और सरकार दोनों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी।

अपील और ट्रिब्यूनल में बदलाव: नई शर्तें

जीएसटी में अपील और ट्रिब्यूनल से संबंधित नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। पहले, यदि किसी राशि पर केवल पेनल्टी लगाई गई होती थी, तो बिना किसी जमा के अपील या ट्रिब्यूनल में जाया जा सकता था। लेकिन अब, अपील या ट्रिब्यूनल में जाने के लिए संबंधित राशि का 10% या 20% जमा करना अनिवार्य होगा। इससे करदाताओं को अपने दायित्वों के प्रति अधिक सतर्क रहना होगा।

टीडीएस और टीसीएस में बदलाव: नई दरें और नियम

टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) और टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस) के नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब, यदि किसी ने दो महीने के लिए भी ₹50,000 का रेंट दिया है, तो उस पर भी टीडीएस काटकर जमा करना होगा। पहले यह सीमा सालाना ₹2,40,000 थी, लेकिन अब यह मासिक आधार पर लागू होगी। इसके अलावा, यदि कोई भी पेमेंट ₹2 लाख या उससे अधिक कैश में किया जाता है, तो उस पर भी टीडीएस देय होगा, चाहे वह सिंगल इवेंट हो या सिंगल बिल। इससे कैश लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर चोरी की संभावनाएं कम होंगी।

उद्योग संगठनों की प्रतिक्रिया: सरलीकरण की मांग

इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन (IIA) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर.के. चौधरी ने कहा कि नए नियमों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को पत्र लिखा जाएगा, जिसमें टैक्स में सरलीकरण की मांग की जाएगी। उनका मानना है कि इससे विदेशी कंपनियों, विशेषकर चीन और अन्य यूरोपीय देशों के उत्पादों का मुकाबला करने में भारतीय उद्योगों को सहायता मिलेगी। उद्यमी राजेश भाटिया ने भी अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के लिए नए प्रावधानों में बदलाव को आवश्यक बताया।

कर प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम

ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली और जीएसटी में किए गए अन्य संशोधन कर प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इनसे कर चोरी पर अंकुश लगेगा, सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी, और उद्योगों के लिए एक समान और प्रतिस्पर्धी वातावरण तैयार होगा। हालांकि, उद्योगों को इन बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में कुछ चुनौतियाँ आ सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से ये सुधार सभी के लिए लाभदायक सिद्ध होंगे।


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