भोजपुरी साहित्य के स्तंभ जुगानी भाई का निधन: पूर्वांचल में शोक की लहर
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-16 15:36:44

भोजपुरी साहित्य के प्रतिष्ठित साहित्यकार और आकाशवाणी गोरखपुर के पूर्व निदेशक रवींद्र श्रीवास्तव, जिन्हें 'जुगानी भाई' के नाम से जाना जाता था, का शुक्रवार, 14 फरवरी 2025 को उनके आवास पर निधन हो गया। उनकी अंतिम यात्रा राजघाट पर संपन्न हुई, जिसमें साहित्य और कला जगत के अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
जीवन परिचय
रवींद्र श्रीवास्तव का जन्म 12 मई 1942 को गोरखपुर जनपद के भवाजीतपुर (पंचगांवां) गांव में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1978 में हिंदी में एमए की डिग्री प्राप्त की। शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने आकाशवाणी गोरखपुर में कार्यक्रम अधिकारी के रूप में अपनी सेवा दी और भोजपुरी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
साहित्यिक योगदान
जुगानी भाई ने आकाशवाणी गोरखपुर के लिए 500 से अधिक लघु नाटिकाओं का लेखन और निर्देशन किया। उनका कार्यक्रम 'पंचों जय जवान, जय किसान' विशेष रूप से लोकप्रिय रहा, जिसे पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े चाव से सुना जाता था। इसके अलावा, उन्होंने 'बेंगुची चलल ठोंकावे नाल' नामक साप्ताहिक स्तंभ भी लिखा, जो पाठकों के बीच काफी चर्चित रहा।
प्रमुख कृतियाँ
उनकी प्रमुख रचनाओं में 'मोथा अउर माटी', 'गीत गांव-गांव के', 'नोकियात दूब', 'अखबारी कविता', 'ई कइसन घवहा सन्नाटा', 'अबहिन कुछ बाकी बा' और 'खिड़की के खोली' शामिल हैं। इन कृतियों के माध्यम से उन्होंने भोजपुरी साहित्य को समृद्ध किया और उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
सम्मान और पुरस्कार
जुगानी भाई को उनके साहित्यिक योगदान के लिए कई सम्मान मिले, जिनमें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से 'लोकभूषण सम्मान', वर्ष 2013 में 'आचार्य विद्यानिवास मिश्र स्मृति सम्मान' और वर्ष 2015 में 'भिखारी ठाकुर सम्मान' प्रमुख हैं। इन सम्मानों ने उनके साहित्यिक कद को और बढ़ाया।
निधन और शोक
83 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से साहित्य और कला जगत में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह कला और साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
रवींद्र श्रीवास्तव 'जुगानी भाई' का निधन भोजपुरी साहित्य के लिए एक बड़ी क्षति है। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा, और उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।