भीलवाड़ा में दिव्यांग सहायता शिविर: हजारों ज़िंदगियों में लौटी रौशनी
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-15 13:56:14

भीलवाड़ा में दिव्यांग सहायता शिविर: हजारों ज़िंदगियों में लौटी रौशनी
भीलवाड़ा में आयोजित भारत विकास परिषद राजस्थान मध्य प्रांत के तीन दिवसीय दिव्यांग सहायता शिविर ने न केवल ज़रूरतमंदों को सहायता प्रदान की, बल्कि उनके जीवन में एक नई रौशनी भी भर दी। यह शिविर स्वर्गीय मनीष काबरा की पहली पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें हजारों दिव्यांगजन लाभान्वित हुए। हादसों में अंग खो चुके लोगों के लिए यह शिविर एक वरदान साबित हुआ।
शिविर की विशिष्टता: कृत्रिम अंग और उपकरण वितरण
शिविर में कृत्रिम हाथ, पैर, कैलीपर्स, श्रवण यंत्र, ट्राईसाईकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, और स्टिक जैसी सहायता प्रदान की गई। चित्तौड़गढ़ के मुकेश कुमार और बिलिया के ऋषिकेश ने कृत्रिम हाथ लगवाने के बाद अपनी खुशी ज़ाहिर की। वहीं, नंदराय के जमलालाल माली और कोटिया के भंवरलाल जाट ने कृत्रिम पैर लगवाने के बाद बाइक चलाकर अपनी खुशी का इज़हार किया।
आभार और भावनात्मक क्षण
शिविर में लाभान्वित हुए दिव्यांगजनों की आंखों में खुशी के आंसू थे। भीलवाड़ा के रणजीत सिंह और स्वरूप कंवर ने श्रवण यंत्र पाकर अपनी खुशी ज़ाहिर की, जबकि कंचन देवी और काली देवी ने ट्राईसाईकिल पाकर आभार प्रकट किया। संजय महाराष्ट्र और शारदा देवी ने व्हीलचेयर पाकर शिविर के हर साल आयोजन की अपील की।
समापन समारोह: समाज के अग्रणी लोगों का योगदान
शिविर के समापन समारोह में उद्योगपति और समाजसेवी तिलोक चंद्र छाबड़ा मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम विकास राष्ट्रीय प्रकल्प के चेयरमैन श्याम शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सीएमएचओ डॉ. सीपी गोस्वामी और समाजसेवी श्रीगोपाल राठी उपस्थित रहे। शिविर को सफल बनाने में निशक्तजन वनवासी सहायता प्रकल्प के प्रांतीय संयोजक संजय बम्ब, सहसंयोजक मोहित पाराशर, और प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर प्रसाद काबरा का विशेष योगदान रहा।
आंकड़े और उपलब्धियां: दिव्यांगजन हुए लाभान्वित
भाविप मध्य प्रांत के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडानी के अनुसार, शिविर के पहले दिन 650 दिव्यांगजनों ने पंजीकरण कराया, जिन्हें उपकरण वितरित किए गए। दूसरे दिन 445 दिव्यांगजनों ने पंजीकरण कराया और तीसरे दिन भी सैकड़ों लोग लाभान्वित हुए। यह शिविर दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
सुविधाओं की व्यवस्था: हर ज़रूरत का ख्याल
शिविर संयोजक गिरीश अग्रवाल ने बताया कि दिव्यांगजन और उनके परिवारजनों के लिए भोजन और आवास की समुचित व्यवस्था की गई थी। यह सुनिश्चित किया गया कि सभी लाभार्थी बिना किसी असुविधा के शिविर का पूरा लाभ उठा सकें।
प्रेरणा और भविष्य की योजनाएं
प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर काबरा, जिन्होंने पिछले 28 वर्षों में 43 शिविरों का आयोजन किया है, ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रेरणा से यह शिविर न केवल भीलवाड़ा में बल्कि पूरे राजस्थान में दिव्यांगजनों के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक बन गया है।
रिपोर्ट : पंकज पोरवाल, भीलवाड़ा