भविष्य के युद्ध: तकनीक के साथ नई अवधारणाओं की आवश्यकता पर सीडीएस जनरल अनिल चौहान का जोर


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-15 12:05:02



भविष्य के युद्ध: तकनीक के साथ नई अवधारणाओं की आवश्यकता पर सीडीएस जनरल अनिल चौहान का जोर

बेंगलुरु में आयोजित एयरो इंडिया 2025 के सेमिनार में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने भविष्य के युद्धों में तकनीक की भूमिका और नई सैन्य अवधारणाओं के विकास पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी प्रगति से युद्ध नहीं जीते जा सकते; इसके लिए नई रणनीतियों, सिद्धांतों और संगठनों की आवश्यकता होगी।

तकनीक के साथ नई अवधारणाओं का विकास आवश्यक:

जनरल चौहान ने कहा, "भविष्य के युद्धों में तकनीक को शामिल करना जीत का एक हिस्सा मात्र है। हमें नई अवधारणाओं और सिद्धांतों को विकसित करने की आवश्यकता है। इसके लिए नए संगठनों, संस्कृति और प्रक्रियाओं पर काम करना होगा। तकनीक इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, लेकिन यह संपूर्ण समाधान नहीं है।"

युद्ध क्षेत्र का विस्तार और तकनीकी एकीकरण:

उन्होंने युद्ध क्षेत्रों के निरंतर विस्तार पर चर्चा करते हुए बताया कि भू-आधारित युद्ध में शहरी और अन्य नए आयाम जुड़ गए हैं। समुद्री युद्ध में सतह के साथ-साथ पानी के नीचे की लड़ाइयाँ भी शामिल हो गई हैं। हवाई युद्ध अब अंतरिक्ष के निकट तक फैल चुका है। इन सभी क्षेत्रों में सफल होने के लिए तकनीक के साथ-साथ नई रणनीतियों का विकास आवश्यक है।

युद्ध की बदलती प्रकृति:

सीडीएस ने युद्ध की बदलती प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहले युद्ध मानवों के बीच होते थे, लेकिन अब हम ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जहां युद्ध मानव और मशीनों के बीच होंगे। भविष्य में, यह पूरी तरह से स्वायत्त मशीनी युद्ध में परिवर्तित हो सकता है। उन्होंने कहा, "युद्ध अब बहु-क्षेत्रीय हो गए हैं, जिसका अर्थ है कि एक साथ कई क्षेत्रों में लड़ाइयाँ होंगी।"

डिजिटलीकरण और डेटा-केंद्रित युद्ध:

जनरल चौहान ने युद्ध क्षेत्र के डिजिटलीकरण, स्थलीय, हवाई और उपग्रह आधारित सिस्टम की नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रित युद्ध की ओर बढ़ते रुझान पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन सभी कारकों के कारण युद्ध क्षेत्र अधिक बुद्धिमान और जटिल होते जा रहे हैं, जिसके लिए उन्नत तकनीक और नई अवधारणाओं की आवश्यकता है।

जनरल अनिल चौहान के वक्तव्य से स्पष्ट है कि भविष्य के युद्धों में सफलता केवल तकनीकी प्रगति पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि इसके साथ नई सैन्य अवधारणाओं, सिद्धांतों और संगठनों के विकास पर भी जोर देना होगा। सशस्त्र बलों को इन बदलती चुनौतियों के लिए तैयार रहना आवश्यक है।


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