जामिया मिलिया इस्लामिया: अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने 14 को हिरासत में लिया


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-15 08:18:28



 

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हाल ही में हुए घटनाक्रम ने शैक्षणिक माहौल को हिला कर रख दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दो पीएचडी छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने 14 छात्रों को हिरासत में लिया।

घटना का विवरण

10 फरवरी 2025 की शाम से, कुछ छात्रों ने अकादमिक ब्लॉक में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। उनका आरोप था कि प्रशासन ने दो पीएचडी छात्रों के खिलाफ अनुचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इन छात्रों पर 2019 में हुए सीएए विरोध प्रदर्शनों की वर्षगांठ के रूप में 'जामिया प्रतिरोध दिवस' मनाने का आरोप था, जिसके लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। 

प्रदर्शन के दौरान घटनाएं

प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय की सेंट्रल कैंटीन को बंद करवा दिया और उसके बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान कैंटीन में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा सलाहकार के कार्यालय के गेट को भी नुकसान पहुंचाया गया। प्रदर्शन के कारण अन्य छात्रों की कक्षाओं और लाइब्रेरी में पहुंचने में बाधा उत्पन्न हुई, जिससे शैक्षणिक गतिविधियाँ प्रभावित हुईं। 

पुलिस की कार्रवाई

विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर, दिल्ली पुलिस ने 13 फरवरी की सुबह लगभग 4 बजे कार्रवाई करते हुए 14 छात्रों को हिरासत में लिया। पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने परिसर के अंदर प्रवेश नहीं किया, बल्कि प्रशासन ने छात्रों को परिसर से बाहर निकालकर पुलिस को सौंपा। हिरासत में लिए गए छात्रों पर विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा डालने का आरोप है। 

छात्रों की मांगें

प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगें थीं:

दो पीएचडी छात्रों के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द करना।

परिसर में विरोध प्रदर्शनों को प्रतिबंधित करने वाले 2022 के कार्यालय ज्ञापन को निरस्त करना।

भित्तिचित्रों और पोस्टरों के लिए लगाए गए 50,000 रुपये के जुर्माने को खत्म करना।

भविष्य में विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्रों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न हो, यह सुनिश्चित करना।

छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी मांगों पर चर्चा के लिए कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, जिसके कारण उन्हें प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ा। 

विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने न केवल शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा डाली, बल्कि विश्वविद्यालय की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर चर्चा के लिए एक समिति के माध्यम से बातचीत की पेशकश की थी, जिसे छात्रों ने अस्वीकार कर दिया। प्रशासन का यह भी कहना है कि उन्होंने कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस से हस्तक्षेप का अनुरोध किया। 

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हालिया घटनाएं शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर करती हैं। जहां एक ओर छात्रों का कहना है कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है, वहीं प्रशासन का दावा है कि शैक्षणिक माहौल को बनाए रखने के लिए उन्होंने आवश्यक कदम उठाए हैं। इस मामले में सभी पक्षों के बीच संवाद और समझ की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके।


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