प्रयागराज में महाकुंभ स्नान के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की बस बुधवार तड़के भीषण सड़क हादसे का शिकार


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-15 07:07:21



फतेहपुर सड़क हादसे का भयावह मंजर: हादसे पर उठते गंभीर सवाल

प्रयागराज में महाकुंभ स्नान के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की बस बुधवार तड़के भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गई। यह हादसा इतना भयानक था कि जिसने भी इसे देखा, उसकी रूह कांप उठी। मिनी बस पहले एक डंपर से भिड़ी और फिर करीब दो किलोमीटर तक घिसटती चली गई। इस भयावह दुर्घटना में चार श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद बस के अंदर का दृश्य किसी भयानक फिल्मी सीन से कम नहीं था। चारों ओर खून ही खून था, यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर राहगीरों की भी आंखें नम हो गईं।

कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?

यह दुर्घटना कानपुर-प्रयागराज हाईवे पर फतेहपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में नूरपुर बक्सर मोड़ के पास हुई। दिल्ली के उत्तम नगर से 21 श्रद्धालु मिनी बस में सवार होकर प्रयागराज महाकुंभ स्नान के लिए निकले थे। मंगलवार शाम 5 बजे बस दिल्ली से चली थी और 12 घंटे में 500 किलोमीटर से अधिक की यात्रा पूरी कर चुकी थी। बस में केवल एक ही चालक था, जबकि इतनी लंबी यात्रा के लिए कम से कम दो चालक होने चाहिए थे।

बुधवार सुबह जैसे ही मिनी बस फतेहपुर पहुंची, तभी वह एक गिट्टी लदे डंपर से पीछे से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मिनी बस का आगे का हिस्सा ट्रॉले में फंस गया और वह लगभग दो किलोमीटर तक घिसटती चली गई। इस दौरान यात्रियों की सांसें अटक गईं। मिनी बस में सवार श्रद्धालु अनूप कुमार झा ने बताया कि बस में बैठे सभी लोगों को ऐसा लग रहा था जैसे मौत उन्हें अपने साथ खींचकर ले जा रही हो।

चीख-पुकार और मौत का साया

हादसे के समय बस में जो कुछ हुआ, वह बेहद दहशत भरा था। तेज धमाके की आवाज के साथ बस झटके से आगे बढ़ी और सभी यात्री एक-दूसरे पर गिर पड़े। किसी का सिर टकराया, किसी का चेहरा खून से लथपथ हो गया। चारों ओर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। सबसे भयानक स्थिति तब बनी जब यात्रियों को एहसास हुआ कि बस बिना चालक के ही दौड़ रही है।

बस के चालक विवेक कुमार (28) की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जिसके बाद मिनी बस अनियंत्रित होकर 12 मिनट तक चलती रही। सभी यात्री लगातार चिल्ला रहे थे— "रोको-रोको, कोई बचाओ!" लेकिन बस कैसे रुकती? चालक तो अब इस दुनिया में नहीं था। करीब दो किलोमीटर बाद जैसे ही बस रुकी, तब सभी यात्रियों ने भगवान का धन्यवाद किया।

भयावह दृश्य: खून से सनी बस और बिखरा सामान

हादसे के बाद जब राहगीर मौके पर पहुंचे, तो बस के अंदर का नज़ारा दिल दहला देने वाला था।

सीटें टूटी पड़ी थीं, सभी यात्री घायल थे।

बस की खिड़कियों और दरवाजों पर खून के छींटे थे।

यात्रियों के सामान बिखरे पड़े थे, कुछ लोगों के जूते-चप्पल तक गायब हो चुके थे।

बस के फाइबर और लोहे के टुकड़े पूरे दो किलोमीटर तक सड़क पर बिखरे हुए थे।

मौत के आंकड़े और घायलों की स्थिति

इस हादसे में चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों के नाम इस प्रकार हैं:

विवेक कुमार (28) - बस चालक

प्रेमकांत झा (55)

दिगंबर झा (60)

विमल चंद्र झा (52)

इसके अलावा, हादसे में 11 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें शामिल हैं:

मीरा देवी (50)

रीता देवी (45)

जय नाथ झा (55)

सतीश मिश्रा (50)

बीना देवी (50)

जय लक्ष्मी देवी (60)

वेदना झा (45)

घायलों को पहले गोपालगंज सीएचसी अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर रूप से घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

पुलिस की सक्रियता और जांच प्रक्रिया

हादसे की सूचना मिलते ही फतेहपुर पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई।

42 मिनट के भीतर पुलिस मौके पर पहुंच गई।

10 मिनट के अंदर एंबुलेंस की व्यवस्था कर दी गई।

घायलों को पुलिस वाहन और दो एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया।

फतेहपुर के एएसपी विजय शंकर मिश्रा ने बताया कि डंपर चालक मौके से फरार हो गया है। पुलिस ने डंपर को कब्जे में ले लिया है और ड्राइवर की तलाश जारी है।

टूर एंड ट्रैवल एजेंसी पर सवाल

यह मिनी बस दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 24 स्थित इशिता टूर एंड ट्रैवल्स एजेंसी की थी। हादसे के कारण ट्रैवल एजेंसी भी सवालों के घेरे में हैं - 

इतनी लंबी यात्रा के लिए एक ही चालक क्यों था?

बस की तकनीकी जांच क्यों नहीं हुई?

क्या यात्री सुरक्षा से जुड़ी गाइडलाइंस का पालन किया गया था?

शोक में डूबे परिवार, प्रशासन ने जताया दुख

हादसे में मारे गए और घायल हुए श्रद्धालु दिल्ली के मोहन गार्डन और उत्तम नगर क्षेत्र के रहने वाले थे। इस हादसे ने उनके परिवारों को गहरे शोक में डाल दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने हादसे पर दुख व्यक्त किया है और प्रशासन को पीड़ितों को हरसंभव मदद देने के निर्देश दिए हैं।

निष्कर्ष: कब सुधरेंगे सड़क हादसे?

यह हादसा एक बार फिर यातायात नियमों की अनदेखी और सड़क सुरक्षा की गंभीर खामियों को उजागर करता है।

तेज रफ्तार और नींद में चल रहे चालक – सड़क पर मौत को न्योता देते हैं।

लंबी यात्रा के दौरान दो चालकों की अनिवार्यता – क्यों नहीं थी?

ट्रांसपोर्ट एजेंसियों पर कड़ी निगरानी – कब होगी?

सरकार को अब सड़क सुरक्षा नियमों को और सख्त बनाने की जरूरत है, ताकि आगे से कोई भी श्रद्धालु या आम नागरिक इस तरह की दर्दनाक घटना का शिकार न हो।


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