गेंदलिया के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भामाशाहों का योगदान: शिक्षा में तकनीकी सशक्तिकरण की ओर एक कदम


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-14 17:30:31



गेंदलिया के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भामाशाहों का योगदान: शिक्षा में तकनीकी सशक्तिकरण की ओर एक कदम

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गेंदलिया ग्राम पंचायत में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में हाल ही में भामाशाहों द्वारा छात्रों के लिए कंप्यूटर दान किया गया है, जो शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

भामाशाहों का उदार योगदान

ग्राम के उपसरपंच कमलकांत पोरवाल ने जानकारी दी कि स्थानीय भामाशाह बद्रीलाल पोरवाल, डॉ. भगवानलाल पोरवाल, सत्यनारायण पोरवाल, रामगोपाल पोरवाल, और प्रहलाद पोरवाल ने मिलकर विद्यालय को 25,000 रुपये मूल्य का कंप्यूटर प्रदान किया है। इस उदार योगदान का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों से लैस करना है, जिससे उनकी शिक्षा में सुधार हो सके।

समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

कंप्यूटर दान के इस अवसर पर विद्यालय की प्रिंसिपल अंजू अजमेरा, भद्देर सिंह राणावत, जय सिंह राणावत, केसरीमल खटीक, ईश्वर सोनी, पप्पू सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने भामाशाहों के इस योगदान की सराहना की और इसे छात्रों के भविष्य के लिए लाभकारी बताया।

शिक्षा में तकनीकी सशक्तिकरण का महत्व

वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी संसाधनों का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से छात्र वैश्विक ज्ञान से जुड़ सकते हैं, जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया में सुधार होता है। गेंदलिया के इस विद्यालय में कंप्यूटर की उपलब्धता से छात्रों को डिजिटल शिक्षा का लाभ मिलेगा, जो उनकी शैक्षणिक प्रगति में सहायक होगा।

भामाशाहों की परंपरा और समाज पर प्रभाव

राजस्थान में भामाशाहों की परंपरा रही है, जहां समाजसेवी अपने संसाधनों का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करते हैं। गेंदलिया के भामाशाहों द्वारा किया गया यह योगदान न केवल छात्रों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता और समर्थन को भी दर्शाता है।

गेंदलिया के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भामाशाहों द्वारा कंप्यूटर दान करना शिक्षा के क्षेत्र में एक सराहनीय कदम है। इससे न केवल छात्रों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों का लाभ मिलेगा, बल्कि यह अन्य समाजसेवियों को भी शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।

रिपोर्ट : पंकज पोरवाल, भीलवाड़ा।


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