नया आयकर विधेयक 2025: कर प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-14 08:09:34

भारत सरकार आयकर कानूनों को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नया आयकर विधेयक 2025 संसद में पेश करने की तैयारी में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को बजट भाषण में इस विधेयक की घोषणा की थी, जिसे केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। माना जा रहा है कि यह विधेयक 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
विधेयक की संरचना और विशेषताएँ:
नया आयकर विधेयक 622 पन्नों का होगा, जिसमें 536 धाराएँ और 23 अध्याय शामिल हैं। यह 1961 के आयकर अधिनियम की जगह लेगा, जो समय के साथ जटिल हो गया था। नए विधेयक में 'पिछले वर्ष' (फाइनेंशियल ईयर) को 'कर वर्ष' (टैक्स ईयर) के रूप में परिभाषित किया गया है, और 'मूल्यांकन वर्ष' (असेसमेंट ईयर) की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया है।
सरलीकरण और पारदर्शिता:
विधेयक का मुख्य उद्देश्य आयकर कानूनों को सरल, स्पष्ट और करदाताओं के लिए अधिक अनुकूल बनाना है। पुराने और जटिल प्रावधानों को हटाकर, भाषा को आसान बनाया गया है, जिससे करदाताओं को नियमों को समझने में आसानी होगी। इसके अलावा, अनुपालन प्रक्रियाओं को भी सरल किया गया है, जिससे करदाताओं का बोझ कम होगा।
सीबीडीटी की नई शक्तियाँ:
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को कर प्रशासन से संबंधित नियमों को लागू करने, अनुपालन उपायों को पेश करने और डिजिटल कर निगरानी प्रणाली को लागू करने की स्वतंत्रता मिलेगी। इससे नौकरशाही में देरी कम होगी और कर प्रशासन अधिक गतिशील बनेगा।
डिजिटल लेनदेन और क्रिप्टोकरेंसी पर ध्यान:
नए विधेयक में डिजिटल लेनदेन और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी) पर विशेष ध्यान दिया गया है। क्रिप्टो एसेट्स को अनडिस्क्लोज्ड इनकम के तहत गिना जाएगा, जैसे नकदी, बुलियन और ज्वेलरी। यह कदम डिजिटल लेनदेन को पारदर्शी बनाने और कर चोरी रोकने के लिए उठाया गया है।
कर विवादों के त्वरित समाधान पर जोर:
प्रस्तावित कानून में कर विवादों के शीघ्र निस्तारण के लिए नए प्रावधान किए गए हैं। करदाताओं को अनावश्यक कानूनी उलझनों से बचाने के लिए एक डिजिटल विवाद समाधान प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे मुकदमों की संख्या में कमी आएगी और करदाताओं को अधिक कर निश्चितता मिलेगी।
नया आयकर विधेयक 2025 भारत की कर प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सुधार का प्रतीक है। सरकार का उद्देश्य कर कानूनों को सरल, पारदर्शी और करदाताओं के लिए अधिक अनुकूल बनाना है, जिससे अनुपालन बढ़ेगा और कर विवादों में कमी आएगी। यदि यह विधेयक संसद में पारित होता है, तो यह 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और देश की कर प्रणाली में एक नया अध्याय जोड़ेगा।