तेजस विमान की डिलीवरी में देरी: एचएएल की कार्यक्षमता पर वायुसेना प्रमुख की नाराज़गी


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-14 05:15:50



तेजस विमान की डिलीवरी में देरी: एचएएल की कार्यक्षमता पर वायुसेना प्रमुख की नाराज़गी

भारतीय वायुसेना के लिए स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस की डिलीवरी में हो रही देरी ने एक बार फिर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने इस मुद्दे पर अपनी असंतुष्टि जाहिर की है।

वायुसेना प्रमुख की नाराज़गी:

एयरो इंडिया 2025 कार्यक्रम के दौरान, वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने एचएएल अधिकारियों से बातचीत में कहा, "मुझे एचएएल पर विश्वास नहीं हो रहा है, जो कि बहुत गलत बात है।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि फरवरी तक 11 तेजस एमके1ए विमानों की डिलीवरी का वादा किया गया था, लेकिन एक भी विमान तैयार नहीं हुआ है। 

एचएएल का स्पष्टीकरण:

एचएएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डी.के. सुनील ने देरी के लिए तकनीकी मुद्दों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ये समस्याएं अब सुलझा ली गई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि एचएएल जल्द ही भारतीय वायुसेना को तेजस विमानों की डिलीवरी शुरू करेगा। 

तकनीकी चुनौतियाँ और आपूर्ति श्रृंखला:

तेजस एमके1ए विमानों की डिलीवरी में देरी का एक प्रमुख कारण जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) द्वारा निर्मित F404 इंजन की आपूर्ति में बाधा रहा है। जीई ने मार्च 2025 से इंजन की आपूर्ति शुरू करने का वादा किया है, जिससे उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है। 

वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या:

भारतीय वायुसेना की लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 31 रह गई है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। इस कमी को पूरा करने के लिए तेजस जैसे स्वदेशी विमानों की समय पर डिलीवरी महत्वपूर्ण है। 

भविष्य की योजनाएँ:

एचएएल ने आश्वासन दिया है कि वह 2025 के अंत तक 11-12 तेजस एमके1ए विमानों की डिलीवरी करेगा। इसके अलावा, एचएएल और जीई के बीच इंजन के लिए 80% तकनीक हस्तांतरण पर चर्चा चल रही है, जिससे भविष्य में उत्पादन में और तेजी आने की उम्मीद है। 

तेजस विमान की डिलीवरी में हो रही देरी ने भारतीय वायुसेना की संचालन क्षमता पर प्रभाव डाला है। एचएएल द्वारा तकनीकी समस्याओं के समाधान और उत्पादन में तेजी लाने के आश्वासन के बावजूद, समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि वायुसेना की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।


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