पुणे में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम का कहर: 37 वर्षीय ड्राइवर की मौत, मामलों की संख्या 192 तक पहुंची


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-02-13 10:04:28



 

पुणे में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में, 37 वर्षीय एक ड्राइवर की इस दुर्लभ तंत्रिका विकार से मृत्यु हो गई, जिससे इस बीमारी से संबंधित मौतों की संख्या सात हो गई है।

मामले का विवरण:

मृतक, जो पुणे में ड्राइवर के रूप में कार्यरत था, ने पहले पैरों में कमजोरी की शिकायत की। उसे पुणे के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन परिवार ने उसे 1 फरवरी को कर्नाटक के निपानी ले जाने का निर्णय लिया। बाद में, उसे सांगली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसे GBS के उपचार के लिए IVIg (इंट्रावीनस इम्यूनोग्लोबुलिन) इंजेक्शन दिए गए।

उपचार के दौरान जटिलताएं:

5 फरवरी को, परिवार ने चिकित्सा सलाह के खिलाफ मरीज को डिस्चार्ज कर पुणे नगर निगम द्वारा संचालित कमला नेहरू अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया। उपचार के दौरान, मरीज को सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (हृदय गति विकार) हुआ। 9 फरवरी को, उसे हृदयाघात हुआ और उसकी मृत्यु हो गई।

GBS मामलों की वर्तमान स्थिति:

पुणे में GBS के संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 192 हो गई है, जिनमें से 167 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 21 मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। 192 मामलों में से 39 पुणे नगर निगम क्षेत्र से, 91 नए जोड़े गए गांवों से, 29 पिंपरी-चिंचवड़ से, 25 पुणे ग्रामीण क्षेत्र से और 8 अन्य जिलों से हैं। अब तक, 91 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है, 48 आईसीयू में हैं, और 21 वेंटिलेटर पर हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों की प्रतिक्रिया:

स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है और GBS के मामलों की निगरानी कर रहा है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी असामान्य लक्षण, जैसे कि अंगों में कमजोरी या झुनझुनी, महसूस होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

पुणे में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य अधिकारियों और जनता के बीच चिंता बढ़ा दी है। समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप और जागरूकता इस स्थिति से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


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