कोटा में नीट अभ्यर्थी ने की आत्महत्या: व्यक्तिगत कारणों के चलते मौत, पुलिस ने शुरू की जांच
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-13 09:29:51

कोटा, जिसे भारत का कोचिंग हब कहा जाता है, एक बार फिर एक दर्दनाक घटना के चलते सुर्खियों में है। राजस्थान के सवाई माधोपुर से आए एक 18 वर्षीय नीट अभ्यर्थी ने कोटा के दादाबाड़ी इलाके में आत्महत्या कर ली। इस खबर ने न केवल स्थानीय लोगों को, बल्कि देशभर के छात्रों और अभिभावकों को भी झकझोर कर रख दिया है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इस घटना के पीछे पढ़ाई का तनाव नहीं बल्कि व्यक्तिगत कारण हैं।
घटना का विवरण:
कोटा सिटी एसपी अमृता दूहन ने बताया कि मृतक छात्र, जो 12वीं कक्षा का छात्र था और मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रहा था, ने मंगलवार सुबह आत्महत्या कर ली। पुलिस को सुबह 9:30 बजे घटना की सूचना मिली, जिसके बाद दादाबाड़ी थाना प्रभारी मंगलाल यादव मौके पर पहुंचे। छात्र दो कमरों के एक मकान में अकेला रह रहा था।
व्यक्तिगत कारणों की पुष्टि:
एसपी अमृता दूहन ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच में पढ़ाई के तनाव का कोई संकेत नहीं मिला है। पुलिस को मृतक के मोबाइल फोन से कुछ व्हाट्सएप चैट्स मिले हैं, जो उसके निजी कारणों की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि, इन चैट्स की गहराई से जांच की जा रही है ताकि सटीक कारणों का पता चल सके।
फोरेंसिक जांच और परिवार की भूमिका:
पुलिस ने फोरेंसिक टीम को बुलाकर घटनास्थल से सबूत इकट्ठा किए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और छात्र के परिवार को इस दुखद घटना की सूचना दे दी गई है। परिवार के पहुंचने के बाद आगे की प्रक्रिया, जैसे पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की तैयारियां की जाएंगी।
कोटा में आत्महत्या की घटनाएं और मानसिक स्वास्थ्य:
कोटा में यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी छात्र ने आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाया हो। हालांकि इस बार पुलिस ने पढ़ाई के तनाव को कारण नहीं माना है, लेकिन कोटा में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इस घटना ने फिर से यह मुद्दा उठाया है कि कोचिंग हब में छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता कितनी आवश्यक है।
यह घटना न केवल मृतक छात्र के परिवार के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि व्यक्तिगत समस्याओं को अनदेखा न किया जाए। जरूरत है कि छात्र न केवल शैक्षणिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनाए जाएं। इस दुखद घटना से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि संवाद और सहारा किसी भी समस्या का समाधान हो सकता है।