स्कूलों में कृमिनाशक दवा के सेवन से छात्राओं की तबीयत बिगड़ी


  2025-02-12 12:57:25



 

ओडिशा के दो जिलों में सोमवार को स्कूलों में वितरित की गई कृमिनाशक दवाओं के सेवन के बाद कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आई हैं। इस घटना ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और स्कूलों में दवा वितरण की प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का विवरण:

बालासोर जिले के सोरो क्षेत्र में छह छात्राओं को कृमिनाशक दवा के सेवन के बाद उल्टी, मतली और असहजता की शिकायत हुई। उन्हें तुरंत सोरो के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया। इसी तरह, मलकानगिरी जिले में दो अन्य छात्राओं को भी ऐसी ही समस्याओं के बाद जिला अस्पताल में ले जाया गया। 

स्वास्थ्य अधिकारियों की प्रतिक्रिया:

मलकानगिरी जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सीएचएम जगन्नाथ राव ने कहा, "कृमिनाशक दवाओं के ऐसे दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। संभव है कि इन बच्चों को पहले से बुखार हो या वे डर के कारण बीमार पड़ गई हों। अब वे खतरे से बाहर हैं।" 

शिक्षा विभाग की भूमिका:

मलकानगिरी जिले के शिक्षा अधिकारी और सहायक जिला मजिस्ट्रेट उमाप्रसाद दाश ने पुष्टि की कि सभी स्कूलों में छात्रों को कृमिनाशक दवा वितरित की गई है। उन्होंने कहा कि यह वितरण राष्ट्रीय कृमिनाशक दिवस के अवसर पर किया गया था, जिसमें 1 से 19 वर्ष की आयु के बच्चों को दवा दी जाती है। 

राष्ट्रीय कृमिनाशक अभियान:

यह अभियान राज्य स्वास्थ्य विभाग के परिवार कल्याण निदेशालय द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और यूनिसेफ के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों में कृमि संक्रमण को रोकना और उनके स्वास्थ्य में सुधार करना है। 

पूर्व की घटनाएं:

यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा में कृमिनाशक दवा के सेवन के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने की खबरें आई हैं। अगस्त 2022 में गंजाम जिले के जूरा गांव में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी, जहां कई छात्र दवा के सेवन के बाद बीमार पड़ गए थे। 

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि कृमिनाशक दवाओं के गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होते, लेकिन इन घटनाओं ने दवा वितरण की प्रक्रिया और छात्रों की सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता को उजागर किया है। आवश्यक है कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के दौरान सावधानी बरती जाए और छात्रों के स्वास्थ्य की निगरानी की जाए।


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