संगीत निर्देशक प्रीतम चक्रवर्ती के स्टूडियो से ₹40 लाख की चोरी, ऑफिस असिस्टेंट पर मामला दर्ज
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-10 10:45:06

मुंबई के गोरेगांव स्थित प्रसिद्ध संगीत निर्देशक प्रीतम चक्रवर्ती के स्टूडियो, यूनिमस रिकॉर्ड प्राइवेट लिमिटेड, से ₹40 लाख की नकदी चोरी होने का मामला सामने आया है। इस घटना के संबंध में स्टूडियो के एक ऑफिस असिस्टेंट, आशीष सायल (32), के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी की तलाश में टीमों का गठन किया है।
घटना का विवरण
4 फरवरी 2025 को दोपहर लगभग 2 बजे, निर्माता मधु मंटेना ने एक बैग में ₹40 लाख की नकदी प्रीतम के मैनेजर, विनीत छेड़ा, को व्यवसायिक लेनदेन के तहत भेजी थी। विनीत ने इस नकदी को स्टूडियो में एक ट्रॉली बैग में रखा और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के लिए उसी इमारत में स्थित प्रीतम के आवास पर चले गए। उस समय स्टूडियो में आशीष सायल, अहमद खान, और कमल दिशा मौजूद थे।
वापस आने पर, विनीत ने पाया कि ट्रॉली बैग गायब है। अन्य कर्मचारियों से पूछताछ करने पर पता चला कि आशीष सायल ने बैग यह कहते हुए लिया कि वह इसे प्रीतम के आवास पर पहुंचा रहा है। हालांकि, आशीष न तो आवास पर पहुंचा और न ही स्टूडियो वापस आया। उसका फोन भी स्विच ऑफ आ रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, विनीत ने प्रीतम को सूचित किया, जिन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का निर्देश दिया।
पुलिस की कार्रवाई
मलाड पुलिस स्टेशन में विनीत छेड़ा की शिकायत पर आशीष सायल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 381 (नौकर द्वारा मालिक की संपत्ति की चोरी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और उसके रिश्तेदारों से संपर्क कर रही है। साथ ही, आशीष के मोबाइल फोन के कॉल डेटा रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
विशेषज्ञ की राय
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, कार्यस्थल पर इस प्रकार की घटनाएं नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच विश्वास को ठेस पहुंचाती हैं। इसलिए, कंपनियों को अपने वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही, कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच और नियमित ऑडिट जैसी प्रक्रियाओं को अपनाना चाहिए।
यह घटना कार्यस्थल पर आंतरिक सुरक्षा की महत्वपूर्णता को रेखांकित करती है। संगीत उद्योग में इस प्रकार की घटनाएं दुर्लभ हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।