हे मेरे अल्लाह...यह प्रशासन तो गुंगा होकर बैठा, रिश्तेदार है मोन...और खाकी चुप्पी साधे मेरे मौला कोई तो फरिश्ता बनकर उतरे परिवार के लिए
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-02-03 07:02:23

हे मेरे अल्लाह...यह प्रशासन तो गुंगा होकर बैठा, रिश्तेदार है मोन...और खाकी चुप्पी साधे
(मेरे मौला कोई तो फरिश्ता बनकर उतरे परिवार के लिए) रहम करो भायी इस परिवार में दिव्यांग बेटी भी है
यह सच है, कहते भीहैं माहे रमजान पाक और साफ होता है अभि माहे रमजान तो नहीं मगर इनका नाम रमजान है दीन दुखियों की दान धर्म का महीना मेरे मौला तेरी सर जमीन पर यह गरीब परिवार ब मुश्किल अपना गुजर बसर कर रहा है मगर असामाजिक तत्व उसे चैन से रहने नहीं दे रहे हैं रिश्तेदारों ने तो साथ छोड़ दिया क्या प्रशासन इसकी मदद करेगा,
आम आदमी में विश्वास और अपराधी में भय खाकी इसकी मदद करेगी ,आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है की रमजान की आवाज, मदद पर बीकानेर की पुलिस, प्रशासन जरुर मदद करेगा
आमीन