( 55 वर्ष अर्धशतक से भी ज्यादा )पत्रकार रहते हुए मैंने कोई तीर तो नहीं मारा लेकिन मूल्यों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया। और पत्रकारिता की पवित्रता बनाये रखी। कभी कलम झुकी नहीं


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-01-21 17:28:32



बीकानेर एक्सप्रेस समाचार पत्र के ५५ वर्ष

पाठको का असीम प्यार मिला 

—— मनोहर चावला 

आपके अखबार बीकानेर एक्सप्रेस ने ५५ वर्ष पूरे कर लिए है। ५५ वर्ष एक अखबार के लिए बहुत बड़ा समय होता है। अर्धशताब्दी से भी जायदा। ना जाने इतने सालों की कितनी यादों को यह अपने में समेटे हुए है। इस छोटे से अखबार ने इन्दिरा गांधी का इंटरव्यू लिया था, मोरार जी देसाई से भी काफ़ी अन्तरंग बात की थी केंद्रीय सूचना मंत्री हेमवती बहुगुणा से भी गप्पे ठोंके थे। यह बात आल इंडिया स्मॉल न्यूज पेपर्स फ़ेडेशन के नई दिल्ली अधिवेशन में हुई थी। जिसका मैं राजस्थान प्रभारी था। पत्रकार रहते हुए मैंने कोई तीर तो नहीं मारा लेकिन मूल्यों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया। और पत्रकारिता की पवित्रता बनाये रखी। कभी कलम झुकी नहीं और रुकी नहीं। यही कारण रहा कि कभी कल्ला जी नाराज होते तो कभी क्लेक्टर और भी कई अज़ीज़ दोस्त यहाँ तक कि अपने निकट के रिश्तेदार। सच्च जो कड़वा होता है । लेकिन मैं निष्पक्ष रूप से अपनी राह पर चलता रहा। समय के फेर ने मुझे पीआरओ बना दिया। पत्र की लिखावट से परेशान लोग मुझे निरन्तर परेशान करते रहे। लेकिन मैने अपने पद पर रहते हुए कभी भी भ्रष्टचार की बहती गंगा में डुबकी नहीं लगाई। दूर खड़ा देखता रहा।और हर बार जीत सत्य की होती रही। श्री भैरोसिंह शेखावत के मुख्यमन्त्री काल में श्री के.एल. कोचर, सुनील अरोड़ा.ललित के.पंवार, विनोद जुत्शी, जैसे उच्चाधिकारियों के साथ काम करने का अवसर मिला। कुछ ग़लतियाँ की होगी, बहुत कुछ सीखा भी। अशोक गहलोत के सानिध्य में भी काम करने का अवसर मिला। उन्होंने मुझे कई जिम्मेदारिया दी जिसे मैंने बखूबी पूर्ण की। वैसे मुझे शिवचरण माथुर और हरिदेव जोशी के पास भी काम करने का मौका मिला था। करीब बीस साल के सेवाकाल के अंत में मैं जॉइंट डायरेक्टर पद से वर्ष २००२ में सेवानिर्वत हुआ। इधर अखबार बराबर निकलता रहा। छोटे भाई और महबूब अली नियमित रूप से अखबार निकालते रहे। सेवानिर्वति होते ही पुनः अखबार को सम्भाला और बीकानेर में यूएनआई का सवाददाता भी बना। फिर शुरू हुई बेबाक और निडरता की पत्रकारिता। मुझे पत्रकारिता करने का कोई मलाल नहीं रहा। अच्छे और बुद्धिजीवी लोगो से मेरा सम्पर्क हुआ। जिनमें साहित्यकार, रंगकर्मी, लेखक और राजनेता भी थे। शायद आप विश्वास नहीं करेगे कि प्रख्यात लेखक यादवेन्द्र शर्मा चन्द्र ने इस अखबार में बहुत कुछ लिखा। हरीश भदानी भी इस पत्र से जुड़े रहे। साहित्यकार हरदर्शन सहगल वर्षों तक इस पत्र के लिए लिखते रहे। राजेन्द्र मोहन भटनागर इस पत्र से काफ़ी जुड़े रहे। महबूबअली तो इस पत्र की जान थे उनके जाने के बाद सुरेश शर्मा एडवोकेट ने कचहरी परिसर से- स्तंभ में खूब लिखा। जानकीं नारायण श्रीमाली ने अपने अनुभवों को इस पत्र के माध्यम से साझा किया। रतनलाल डागा ने भी विभिन्न विषयों पर १०० से जायदा आइटम लिखकर रिकार्ड तोड़ा। तीन सेवानिर्वत सत्र न्यायाधीशों लीलाधर स्वामी, मुरलीधर गोस्वामी और पटवर्धन जी ने न्यायिक मामलो को सुलझाने में आने वाली कठिनाइयों और अपने कई महत्वपूर्ण फैसलों से पत्र के पाठको को अवगत कराया। अजीत सिंह सिंघवी आईएएस ने अपनी लेखनी से जता दिया कि प्रशासनिक अधिकारी भी अपनी प्रखर लेखनी से जनता को जागरूक कर सकते है। इस क्षैत्र में अनेक बुद्धिजीवियों से मिलना हुआ। श्याम जी आचार्य, गुलाब बत्रा, प्रवीण भाई साहब, राजेन्द्र बोड़ा , ललित शर्मा और भी अनेक लोगो का सानिध्य मिला। कुछ खोया लेकिन पाया बहुत कुछ। धन्यवाद मेरे मालिक का किसी भी सेवा में कोई दाग नहीं लगा। अब उम्र के आखिरी पड़ाव पर हूँ लेकिन पत्रकारिता का मोह फिर भी नहीं छूटता और पत्र की नियमत्ता बरक़रार रखें हुए हूँ। पत्नी गम्भीर रोगों से ग्रस्त है और मैं भी ब्लड- कैंसर का मरीज हूँ। अभी चंद दिनों पहले एक रात को हार्ट- अटेक हुआ। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के हल्दीराम हॉस्पीटल के आईसीयू में पाँच दिन भर्ती रहा। डॉ. पिंटू नाहटा ने इंजोग्राफ़ी की। एक नस ८० पर्सेंट दूसरी ७० और तीसरी में ६० प्रतिशत ब्लॉकेट्स थे और एक नस तो १०० प्रतिशत ब्लॉक थी लेकिन किसी कट की वजह से कहीं और से ब्लड उसमे प्रवाह हो रहा था। और जीवन चल रहा था अब बायपास भी सम्भव नहीं था ऐसी स्थिति में ऊपरवाले का ही सहारा रहा है। मौत से डर नहीं रहा वो तो आनी है एक दिन। फिर भी कहीं गया भी तो भी मैं आपके सदा आस- पास रहूँगा। क्योंकि पाठको का असीम प्यार मैं भूला नहीं हूँ। उनकी दुवाओ का असर है कि पत्र विपरीत परिस्थियों के बावजूद भी नियमित रूप से प्रकाशित हो रहा है।

लेखक ,चिंतक, विचारक ,संपादक बीकानेर एक्सप्रेस ,पूर्व जनसंपर्क अधिकारी मनोहर चावला की सटीक कलम से


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