तेजपुर के पोकी में रूपकुँवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की 75वीं पुण्यतिथि पर सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-01-19 17:42:44



 

तेजपुर के हृदय में स्थित पोकी केवल 150 वर्ष पुराना घर नहीं, बल्कि असम की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। 17 जनवरी 2025 को, रूपकुँवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की 75वीं पुण्यतिथि के अवसर पर, यहां एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसने असमिया संस्कृति के इस महानायक के योगदान को पुनः स्मरण किया।

पोकी का ऐतिहासिक महत्व

पोकी जिसे अब 'ज्योति भारती संग्रहालय' के नाम से जाना जाता है, 1874 में हरिबिलास अग्रवाल द्वारा निर्मित किया गया था। यह घर असम के सोनितपुर जिले में पहला पक्का मकान था, जिसका वास्तुशिल्प अहोम और राजस्थानी शैली का मिश्रण है। मूल रूप से राजस्थान से आए अग्रवाल परिवार ने असमिया संस्कृति को अपनाते हुए इसे समृद्ध किया। 

ज्योतिप्रसाद अग्रवाल: एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अग्रदूत

ज्योतिप्रसाद अग्रवाल, हरिबिलास अग्रवाल के पौत्र, ने असमिया साहित्य और संस्कृति में नवजागरण लाया। उन्होंने 1935 में असम की पहली फिल्म 'जॉयमती' का निर्माण किया और 'ज्योति संगीत' की रचना की, जो आज भी पूर्वोत्तर भारत में प्रेरणा का स्रोत है। उनकी रचनाएँ—नाटक, कविताएँ, लघुकथाएँ, पत्रकारिता लेखन, गीत और संगीत—ने असमिया समाज को गहराई से प्रभावित किया। 

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

ज्योतिप्रसाद अग्रवाल ने महात्मा गांधी के प्रभाव में आकर 1930 में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। 'पोकी' ने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, लाला लाजपत राय, मोतीलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय जैसे नेताओं की मेजबानी की, जो असम के स्वतंत्रता संग्राम में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। 

 

पोकी में सांस्कृतिक गतिविधियाँ

पोकी में ज्योतिप्रसाद ने अपने कई अमर गीत, कविताएँ और नाटक लिखे। मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने शोणित कुंवरी नाटक की रचना यहीं की और बाद में इसे बान थिएटर, तेजपुर में मंचित किया। उन्होंने पश्चिमी संगीत वाद्ययंत्रों को असमिया संगीत में शामिल कर इसे समृद्ध किया। 

ज्योति भारती संग्रहालय: एक सांस्कृतिक धरोहर

वर्तमान में, पोकी को ज्योति भारती संग्रहालय के रूप में संरक्षित किया गया है, जहां ज्योतिप्रसाद अग्रवाल के हस्तलिखित पांडुलिपियाँ, संगीत वाद्ययंत्र और व्यक्तिगत वस्तुएँ प्रदर्शित हैं। यह संग्रहालय उनके जीवन और कार्यों की झलक प्रस्तुत करता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। 

शिल्पी दिवस का आयोजन

17 जनवरी 2025 को, ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की 75वीं पुण्यतिथि के अवसर पर, असम सरकार द्वारा 'शिल्पी दिवस' के रूप में मनाया गया। इस दिन, 'पोकी' में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें उनके योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्यमंत्री ने उनके कार्यों को स्मरण करते हुए असमिया संस्कृति में उनके योगदान की सराहना की। 

पोकी न केवल एक ऐतिहासिक भवन है, बल्कि असमिया संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का साक्षी है। ज्योतिप्रसाद अग्रवाल के जीवन और कार्यों ने असमिया समाज को नई दिशा दी, और पोकी आज भी उस समृद्ध विरासत को संजोए हुए है।


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