मकर संक्रांति पर कर्नाटक में परंपरा बनी हादसे का कारण: दो लोग घायल
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-01-16 05:22:07

कर्नाटक के मांड्या जिले के होसहल्ली गांव में मकर संक्रांति के अवसर पर एक पारंपरिक अनुष्ठान के दौरान दो लोग घायल हो गए। इस अनुष्ठान में गायों और बैलों को जलती हुई आग के ऊपर से गुजारा जाता है, जिसे 'किच्चु हैसुवुडु' कहा जाता है।
किच्चु हैसुवुडुपरंपरा: आग से गुजरते मवेशी
किच्चु हैसुवुडु कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में मकर संक्रांति के दौरान मनाया जाने वाला एक पारंपरिक अनुष्ठान है। इसमें मवेशियों को सजाया जाता है और उन्हें जलती हुई आग के ऊपर से दौड़ाया जाता है। मान्यता है कि इस प्रक्रिया से मवेशियों के पैरों में होने वाले संक्रमण दूर होते हैं और वे स्वस्थ रहते हैं।
हादसे का विवरण: दो लोग घायल
होसहल्ली गांव में इस वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित 'किच्चु हैसुवुडु' अनुष्ठान के दौरान दो व्यक्ति घायल हो गए। घायलों को तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। यह घटना तब हुई जब मवेशियों को आग के ऊपर से दौड़ाया जा रहा था और अचानक वे बेकाबू हो गए, जिससे उपस्थित लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
पारंपरिक अनुष्ठानों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने पारंपरिक अनुष्ठानों की सुरक्षा और उनमें शामिल खतरों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अनुष्ठानों में सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके। साथ ही, पशु अधिकार संगठनों ने भी मवेशियों के साथ होने वाले इस प्रकार के व्यवहार पर आपत्ति जताई है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया: जांच के आदेश
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि परंपराओं का सम्मान करते हुए भी सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा उपायों की आवश्यकता: भविष्य की चुनौतियां
इस घटना के मद्देनजर, विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसे पारंपरिक अनुष्ठानों के आयोजन के दौरान सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। साथ ही, पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी आवश्यकता है, ताकि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
परंपरा और सुरक्षा के बीच संतुलन आवश्यक
होसहल्ली गांव की यह घटना दर्शाती है कि पारंपरिक अनुष्ठानों के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन कितना महत्वपूर्ण है। परंपराओं का सम्मान करते हुए भी हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी की जान-माल को खतरा न हो और पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए।