राजस्थान की मरूगंगा बीकानेर के पत्रकारो ने भी डुबकी लगाई ! ——मनोहर चावला
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2025-01-15 09:24:46

मैंने पत्रकारों के साथ शाही रेल गाड़ी— प्लेस ऑन व्हील- की यात्रा के आनन्द को पिछले अंक में आपको बताया था इस बार पत्रकारो के साथ आरम्भ से अंत तक की गई राजस्थान नहर की यात्रा का वर्णन आपसे शेयर कर रहा हूँ। बात वर्ष १९७९ की है मैं बीकानेर में पी आर ओ था एम.के . खन्ना कलेक्टर थे। इंदिरा गांधी नहर तब राजस्थान नहर थी। १९८४ में नहर का नाम इन्दिरा गाँधी नहर रखा गया। उस समय नहर मंत्री चंदनमल वैद थे एक बार जब वो बीकानेर आए तब बसलपुर सरपंच देवीसिंह भाटी शिष्ट मण्डल के साथ नहर का पानी बासलपुर तक लाने के लिए उनसे मिलने सर्किट हाउस आए। चन्दनमल वैद ने उन्हें यह कह दिया कि आप कभी तो बसलपुर बॉर्डर से बहावलपुर पाकिस्तान चले जाते हो, कभी हमारे यहाँ आ जाते हो। इतना सुनते ही भाटी जी नारे लगाते बाहर आए और कहा कि मन्त्री जी हमे देशद्रोही बता रहे हैऔर हमे पाकिस्तानी कहते है। अगले दिन नहर मन्त्री राजस्थान नहर के ३६५ हेड का अवलोकन करने गए। मैं भी उनके समाचारों की कवरेज करने साथ गया था कलेक्टर और अन्य अधिकारी भी उनके साथ थे। इस दौरान देवीसिंह भाटी एक जीप में अपने साथियों के साथ आए और ऐसा बघेड़ा किया कि पतले- दुबले मन्त्री जी लुढ़कते हुए जमीन पर ओंधे मुँह गिर पड़े और उनकी गाँधी टोपी कहीं दूर जाकर गिरी। जिसे मैंने लाकर उन्हें दी। इधर देवीसिंह भाटी वापिस जीप में बैठकर यह कहते रवाना हो गए कि साला हमे पाकिस्तानी कहता है । कलेक्टर ने फ़ोरन चन्दनमल वैद को उठाया। श्री वैद ने मुझे कहा कि यह घटना किसी भी हालत में अखबारों में नहीं आनी चाहिए। मैं वहाँ से तुरन्त रवाना होकर बीकानेर में अखबारों के दफ्तरों में पहुचा। इससे पहले ही उनके पास देवीसिंह भाटी की प्रेस विक्षप्ति आ चुकी थी मैंने अपनी दोस्ती की कसम देकर और इल्तिजा कर इस न्यूज को आगे जाने से रुकवाया। अगले दिन के न्यूज पेपर्स में भाटी जी की न्यूज नदारद थी। नहर मन्त्री ने मुझे सर्किट हाउस बुलवाकर धन्यवाद दिया। मैं भी अवसर का लाभ उठाने से नहीं चूका। उनसे कहा कि आप नहर मन्त्री हैं एक बार तो बीकानेर के पत्रकारो को भी राजस्थान नहर का शुरू से अंत तक का अवलोकन करवाये ताकि इनको भी नहर की पूरी जानकारी हो सके। नहर मंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था तो मैं अभी कर देता हूँ। उन्होंने वहाँ मौजूद चीफ इंजीनियर को आदेश दिए कि पी आर ओ साहब पत्रकारो के साथ जब भी पूरी नहर का अवलोकन करना चाहे आप इनकी पूरी व्यवस्था करेगे। बस फिर क्या था मैंने बीकानेर के छोटे- बड़े सभी पत्रकारो को सूचित किया कि जो भी सात दिनों की नहर यात्रा के लिए चलना चाहे वो कार्यालय में अपना नाम तीन दिवस के भीतर दे देवे। लगभग उन्नीस पत्रकारो के नाम आए। हमने पत्रकारो की सूची और रवानगी का कार्यक्रम मुख्य अभियंता को भेज दिया। नियत दिन और नियत समय पर आठ कारे जिनमे एक एक कार में इंजीनियर भी था ,सूचना केंद्र में मौजूद थी पत्रकारो में बिरजुभा, ललित आज़ाद, पनालाल प्रेमी , रमेश महृषि,केडीहर्ष, सिद्धराज, रामेश्वर, सन्तोष जैन, गुरु लक्ष्मीनारायण, भानू व्यास, अशोक माथुर, झंवर लाल, और भी कई अखबारों के प्रतिनिधि हमारे साथ थे। आठ कारो में -१९- पत्रकारो का यह काफिला नहर यात्रा के लिए निकल पड़ा। सर्वप्रथम हुसंसार हेड, मालकीसर हेड , राजियासर हेड, और बिरधवाल हेड,से सूरतगढ़ होते हुए हनुमानगढ़ मसीदावाली हेड पहुँचा। जहाँ गेस्ट हाऊस में रहने खाने और ठहरने की उत्तम व्यवस्था थी वैसे भी नहर किनारे जहाँ जहाँ रुकते वहाँ चाय- दूध- लस्सी- कोकाकोला और नमकीन- मीठे से स्वागत होता। नहर मंत्री जी के मेहमान जो थे । कई स्थानों पर नहर के किनारे पत्रकारो ने सन्नान किया कहीं कहीं डुबकी भी लगाई। मसीदा वाली हेड के साथ नहर किनारे हमारी यात्रा थी रात्रि भटिंडा में रुकने का शानदार इंतज़ाम था वहाँ से रवाना होकर अमृतसर स्वर्ण मन्दिर गुरुद्वारे के दर्शन करते हुए भगतसिंह के स्मारक पर गए। वहाँ पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और फिर पहुँचे हरि के बैराज- जहाँ रावी व्यास और सतलज तीनों नादियों का संगम था यही से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के पानी का बँटवारा होता था यहाँ संगम में स्नान करने में पत्रकार नहीं चुके। पूरा अध्यन कर हम नहर के किनारे- किनारे चलते श्रीविजयनगर होते खाजूवाला, छत्तरगढ़ होते, बजू, नाचना में नहर निर्माण कार्य को देखते बाबा रामदेव की समाधि पर धोक देते मोहनगढ़ होते जैसलमेर पहुँचे ।जहाँ पटवो की हवेलियाँ और सम के धोरो के बीच काफ़ी समय गुजारा और अब लौट चले अपने बीकानेर की और। ६५० किलोमीटर लम्बी नहर की इस रोमाचिक यात्रा के बारे में बीकानेर के अख़बार वाले निरन्तर लिखते रहे। काफ़ी सालो तक इस यात्रा की पाटो पर भी चर्चा होती रही। यह यात्रा एक ऐतिहासिक यात्रा बन गई थी पूरे शहर में इस यात्रा का जिक्र था । हाँ अब इस यात्रा के अधिकांश चश्मदीद ग्वाह पत्रकार नहीं रहे। फिर भी कभी न भुलाई जाने इस यात्रा के अमूल्य क्षणों को हमेशा याद रखा जाएगा।
लेखक, चिंतक, विचारक, संपादक ,बीकानेर एक्सप्रेस पूर्व जनसंपर्क अधिकारी मनोहर चावला की कलम से