आदमी को चाहिए वक्त से डर कर रहे हैं कौन ना जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिज़ाज !  ——— मनोहर चावला 


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2025-01-07 16:27:47



 

 

जीवन में कुछ पता नहीं चलता कि कब क्या हो जाये? राजा को रंक बनते कई लोगो ने देखा और सुना होगा। ज़्यादा दूर क्यो जाये पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ही देख लें। जहाँ उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का आमंत्रण था उसे ठुकरा कर उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर रहना ही पसंद किया। अब मुख्यमंत्री पद भी चला गया वो चुनावो में हार गए और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकाअर्जुन खड़गे बन गए। अशोक गहलोत न घर के रहे न घाट के। अब वो दिल्ली में किसी भी पद को पाने के लिए जी - हजूरी में लगे रहते है। ऐसे ही वसुंधरा जी को देख लो, कभी महारानी थी, कभी मुख्य मंत्री बन राजस्थान पर राज किया और अब मोदी जी और अमित शाह का अभिवादन कर कुछ बनने का ख्वाब देख रही है ।वक्त बड़ा बलवान होता है। अब हमे देखो हम बीकानेर में पीआरओ थे क्लेक्टर एम. के. खन्ना थे। सिटी मज़िट्रेट ललित. के . पंवार थे। ललित के. पंवार को पढ़ने का बहुत शौक था वह हमेशा ड्यूटी समय के बाद मेरे सूचना केंद्र आ जाते और सूचना केंद्र बंद होने तक पढ़ते रहते। फिर मैं उन्हें स्कूटर पर छोड़ने सर्किट हाउस जाता। उनसे अच्छी मित्रता हो गई। बाद में वो मेरे डाइरेक्टर भी रहे। अब हम मूल घटना पर आते है। उन दिनों सिनेमा थियेटरों पर काफ़ी भीड़ रहती थी कई कई फ़िल्मे छ: छ: महीनों तक चलती। विश्व ज्योति थियेटर में नागिन, नया दौर, धूल का फूल, मुग़ले आज़म फ़िल्में रिकार्ड तोड़ती थी सिनेमा हमेशा हाऊस फुल रहते थे। सिनेमा मालिक लिमिट से ज़्यादा टिकट बेचते थे। दर्शकों को खड़े खड़े या नीचे फर्श पर बैठकर फ़िल्म देखनी पड़ती थी। अतिरिक्त टिकटे बेचकर सिनेमा मालिक मनोरंजन कर की खूब चोरी कर रहे थे। हमे भी फ़िल्में देखने का काफ़ी शौक़ था हमने भी एक बार एडवांस बुकिंग करवाई। लेकिन शो- टाइम पर टिकट चेकर ने हमे अंदर जाने नहीं दिया। टिकट को नक़ली बता कर , धक्का देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया। सारी वस्तु स्थिति को कलेक्टर साहब को अवगत कराया गया। कलेक्टर महोदय ने सिटी मज़िट्रेट ललित, के. पंवार को जाँच के आदेश दिए। उन्होंने मुझे साथ लेकर एक शो की आकस्मिक जाँच की। हॉल में केपेसिटी से ढेढ़ गुना ज़्यादा दर्शक थे उनके पास टिकट नहीं थे। जाँच रिपोर्ट पर क्लेक्टर ने सिनेमा का लाइसेंस निरस्त करते हुवे छ: दिनों के लिये उसको बंद करने के आदेश दिए। अब मालिक हरिबाबू सांसद मनफुल सिंह भादू के पास गए। सांसद उनके मित्र थे हर शाम सांसद उनके सिनेमा- हॉल के विशेष कमरे में इंजॉय करते। पेग से पेग टकरते। सांसद जी ने कलेक्टर से बात की। दाल न गलती देख वो राजनीति करने जयपुर गए। और वहाँ से आदेश करवाये और जनसंपर्क मंत्री से कहकर मेरा ट्रांसफर गंगानगर करवाया। कलेक्टर ने भी मुख्यसचिव से बात कर मेरा डेपुटेशन गंगानगर से बीकानेर करवाया कि आगामी दिनों में राज्य स्तरीय पंचायत राज सम्मेलन है मुझे पीआरओ की जरूरत है। खैर फिर एक वक्त ऐसा आया कि मैं जयपुर में जॉइंट डायरेक्टर के पद पर था और सेल्सटेक्स कमिश्नर से मेरी दोस्ती थी इधर विश्वज्योति सिनेमा बीकानेर पर नक़ली टिकट छापने और लाखो रु की मनोरंजन कर की चोरी करने का आरोप लगा। जुर्माना और कर के लाखों रू हरि बाबू को चुकाने का नोटिस मिला हुआ था। वे इसके बचाव के लिए जयपुर के चक्कर काट रहे थे कि उन्हें पता चला कि चावला के सेल्स टेक्स कमिश्नर सिंधु साहब से अच्छे रिलेशन है तो हरि बाबूजी मेरे निवास पहुंचे - निरंतर ऑफिस भी आते रहे। अपनी पुरानी भूल का अहसास करते हुए मामले को सुलटाने में मदद की गुहार की। फिर मैंने उनकी पूरी मदद कर उनका काम करवाया। इसलिए सही कहा जाता है। कि आदमी को चाहिये वक्त से बच कर रहे, ना जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज। समय और स्थिति कभी भी बदल सकती है इसलिए कभी भी किसी का अपमान न करे और न ही किसी को कमजोर समझे । आप शक्तिशाली हो सकते है लेकिन समय सबसे ज़्यादा शक्तिशाली होता है.।—


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