लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रेरणा से भीलवाड़ा में निकली भव्य शौर्य यात्रा
2024-12-17 19:34:59

वैदेही महिला जागृति संस्थान महिला समन्वय भीलवाड़ा विभाग ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की त्रिशताब्दी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भव्य कार्यक्रम और शौर्य यात्रा का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में दुर्गा वाहिनी, मातृशक्ति, राष्ट्रीय सेविका समिति और सभी हिंदू संगठनों की महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
अहिल्याबाई होलकर: सेवा और शक्ति का प्रतीक
महिला समन्वय की प्रांत संयोजिका नीलप्रभा नाहर ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एक साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद अहिल्याबाई ने इंदौर मालवा की रानी बनकर जन-जन की सेवा की। आक्रांताओं द्वारा ध्वस्त मंदिरों, घाटों और आश्रमों का पुनर्निर्माण कर उन्होंने भारत को एकता के सूत्र में पिरोया। उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए महिलाओं को भी देश की सेवा के लिए आगे आना चाहिए।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजसेविका कांता हुरकट थीं। संचालन डॉ. शोभा गौतम ने किया, जबकि प्रस्तावना महिला समन्वय विभाग सह संयोजिका सुशीला जाट ने रखी। इस दौरान ओजस्विता द्वारा एक काव्य गीत की प्रस्तुति दी गई।
महिलाओं की सक्रियता और संगठन का योगदान
कार्यक्रम में सुशीला पारीक, मनीषा जाजू, नीलू मालू, कीर्ति सोलंकी, खुशबू शुक्ला, सोनल ओझा, गायत्री सोनी, सीमा पारीक, नीता रावत और अन्य महिलाओं ने व्यवस्थाओं को बखूबी संभाला। उनकी सक्रियता ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विभिन्न मार्गों से गुजरी शौर्य यात्रा
कार्यक्रम के समापन के बाद शौर्य यात्रा राजेंद्र मार्ग से शुरू होकर संकट मोचन हनुमान मंदिर, गोल प्याऊ चौराहा, सुभाष मार्केट और सूचना केंद्र से होते हुए अंबेडकर चौराहा पहुंची। यहां डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
565 महिलाओं और युवतियों की ऐतिहासिक भागीदारी
इस शौर्य यात्रा में शहर की 565 युवतियों, बहनों और महिलाओं ने बनारसी साड़ी और मराठी वेशभूषा पहनकर भाग लिया। हाथों में गीता, शिवलिंग, मशाल और तलवार लिए, उन्होंने एकता और शक्ति का प्रतीक प्रस्तुत किया। राष्ट्र सेविका समिति द्वारा घोष वादन, नियुद्ध, और दुर्गावाहिनी द्वारा अखाड़ा प्रदर्शन किया गया, जो यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहा।
शक्ति और सेवा का संदेश
लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रेरणा से आयोजित यह भव्य कार्यक्रम और शौर्य यात्रा महिला शक्ति और सेवा का प्रतीक बन गया। यह आयोजन न केवल उनके योगदान को स्मरण करने का एक प्रयास था, बल्कि समाज में महिलाओं को सशक्त बनाने और एकजुटता का संदेश देने का भी अवसर था।
रिपोर्ट - पंकज पोरवाल, भीलवाड़ा