वकील नहीं बन सकते फुल-टाइम पत्रकार: सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया का बड़ा बयान
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-17 04:52:45

सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने स्पष्ट किया कि एक प्रैक्टिसिंग वकील, फुल-टाइम पत्रकार के रूप में काम नहीं कर सकता। यह प्रतिबंध BCI के आचरण नियम 49 के तहत लागू होता है। इस बयान ने वकालत और पत्रकारिता के पेशे के बीच संतुलन और संघर्ष को उजागर किया है।
मामले का प्रारंभ: वकील और पत्रकारिता का विवाद
यह मुद्दा एक याचिका के तहत सामने आया, जिसमें एक वकील ने दावा किया कि वह फ्रीलांस पत्रकार के रूप में काम करते हैं और उनके खिलाफ दर्ज मानहानि का मामला खारिज किया जाए। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने BCI से इस मामले में उनका पक्ष रखने को कहा।
बार काउंसिल का स्पष्ट रुख
आज सुप्रीम कोर्ट में BCI के वकील ने कहा, "एक वकील एक साथ वकालत और फुल-टाइम पत्रकारिता नहीं कर सकता।" नियम 49 के अनुसार, एक वकील को किसी अन्य पेशे में पूर्णकालिक काम करने की अनुमति नहीं है। बार काउंसिल का यह रुख पत्रकारिता जैसे अन्य पेशों और वकालत के बीच पारदर्शिता और प्रतिबद्धता सुनिश्चित करता है।
याचिकाकर्ता का जवाब और स्वैच्छिक सहमति
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में सहमति दी कि वह न तो पूर्णकालिक और न ही अंशकालिक पत्रकारिता करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह केवल वकालत में सक्रिय रहेंगे। इस पर अदालत ने BCI की उपस्थिति को अनावश्यक मानते हुए यह विवाद समाप्त मान लिया।
फैसले का कानूनी महत्व
यह फैसला वकीलों के पेशेवर आचरण पर गहराई से ध्यान केंद्रित करता है। नियम 49, वकीलों को किसी अन्य पेशे में शामिल होने से रोकने के लिए बनाया गया है ताकि वे अपनी कानूनी जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इस फैसले ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक वकील की जिम्मेदारी केवल अदालत और उसके मुवक्किल तक सीमित नहीं है, बल्कि पेशे की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखना भी है।
मामले की अगली सुनवाई
अदालत ने इस मामले को फरवरी 2025 तक स्थगित कर दिया है, जहां याचिका की मेरिट (मानहानि मामले पर) पर विचार किया जाएगा। अदालत ने कहा कि BCI की उपस्थिति अब आवश्यक नहीं है क्योंकि मुख्य विवाद समाप्त हो चुका है।
पत्रकारिता और वकालत: पेशेवर संतुलन की चुनौती
यह मामला एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है: क्या एक व्यक्ति, जो वकालत जैसे जिम्मेदारीपूर्ण पेशे में है, अन्य पेशों में प्रभावी रूप से योगदान दे सकता है? बार काउंसिल ऑफ इंडिया का मानना है कि वकील का पेशा पूर्णकालिक प्रतिबद्धता की मांग करता है, और अन्य पेशों में शामिल होना इस प्रतिबद्धता को कमजोर कर सकता है।
पेशेवर आचरण की सख्ती आवश्यक
सुप्रीम कोर्ट और BCI का यह रुख वकीलों के पेशेवर मानकों को बनाए रखने की दिशा में एक ठोस कदम है। यह निर्णय न केवल वकीलों को उनके पेशे में केंद्रित रहने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि अन्य पेशों के साथ वकालत के टकराव को भी रोकने में मदद करेगा।
Case no. – SLP(Crl.) No. 9615/2024
Case Title – Mohd. Kamran v. State of Uttar Pradesh and Anr
Source - Live Law