सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महाराष्ट्र सरकार द्वारा डॉक्टरों के लिए किया गया भूमि आवंटन रद्द


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-12-14 18:47:24



 

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा मेडिनोवा रीगल कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (MRCHS) को डॉक्टरों के लिए भूमि आवंटन को रद्द करते हुए पारदर्शिता और नियमों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। कोर्ट ने इसे "समुदाय के लिए भूमि का महत्वपूर्ण संसाधन" बताते हुए राज्य सरकार से वितरण में पारदर्शिता की अपेक्षा की।

भूमि आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट का नजरिया

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भूमि जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों का वितरण सरकार द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि MRCHS को भूमि आवंटन प्रक्रिया में पूर्णतया मनमानी की गई है, जो न केवल प्रक्रियाओं का उल्लंघन है बल्कि पात्रता मानदंडों का भी अनुपालन नहीं करता।

मामले की पृष्ठभूमि: भूमि आवंटन विवाद

यह मामला 2000 में MRCHS द्वारा मुंबई के बांद्रा इलाके में डॉक्टरों के लिए आवासीय सुविधा हेतु भूमि आवंटन के लिए आवेदन से शुरू हुआ। 2003 में महाराष्ट्र सरकार ने इस सोसाइटी को भूमि आवंटन के लिए एक इरादा पत्र (Letter of Intent) जारी किया, लेकिन वह भूमि मूल अनुरोध से अलग थी। इसके बाद, सोसाइटी ने अपने सदस्य कई बार बदले, जिनमें से कई आय सीमा के कारण पात्र नहीं थे।

पक्षकारों की दलीलें

याचिकाकर्ता (प्रपोज्ड वैभव कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड) ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि * MRCHS को नियमों का पालन किए बिना भूमि आवंटित की गई थी।

* MRCHS को सरकार द्वारा विशेष सुविधा दी गई जबकि यह पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करता था।

सरकारी नियमों का उल्लंघन

कोर्ट ने महाराष्ट्र भूमि राजस्व (सरकारी भूमि निपटान) नियम, 1971 और 9 जुलाई 1999 के सरकारी विनियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नियमों के तहत भूमि आवंटन के लिए विस्तृत प्रक्रिया दी गई है।

* नियम 11 के तहत सरकार को लिखित रूप में कारण बताना होता है कि विशेष समाज के पक्ष में भूमि आवंटन क्यों किया गया।

* मामले में यह प्रक्रिया पूरी तरह से अनुपस्थित पाई गई।

बॉम्बे हाई कोर्ट का निर्णय और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

बॉम्बे हाई कोर्ट ने MRCHS के पक्ष में भूमि आवंटन को सही ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि भूमि आवंटन की प्रक्रिया अनुचित और मनमानी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भूमि आवंटन में पारदर्शिता के बिना इसे वैध नहीं ठहराया जा सकता।

न्यायालय का अंतिम आदेश

* सुप्रीम कोर्ट ने MRCHS के पक्ष में भूमि आवंटन रद्द कर दिया।

* कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस प्रक्रिया को पुनः निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संचालित करे।

सारांश और महत्व

यह फैसला न केवल सरकारी संसाधनों के वितरण में पारदर्शिता का महत्व दर्शाता है, बल्कि भविष्य के भूमि आवंटन मामलों के लिए एक दिशा-निर्देश भी प्रदान करता है।


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