क्या बलात्कार और POCSO एक्ट के दोषियों को जेल से खुले शिविरों में भेजा जा सकता है? राजस्थान हाईकोर्ट का निर्णय
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-14 07:57:30

राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर विचार करते हुए, यह मामला बड़ी पीठ को भेजा है कि क्या बलात्कार (धारा 376 आईपीसी) और POCSO एक्ट के दोषियों को जेल से खुले शिविरों में स्थानांतरित किया जा सकता है।
विरोधाभासी निर्णयों का संदर्भ
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढांड़ ने कहा कि इस मामले में विभिन्न खंडपीठों के परस्पर विरोधी निर्णय हैं, जिससे कानूनी अस्पष्टता उत्पन्न हो रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अजीत सिंह बनाम राजस्थान राज्य मामले में एक खंडपीठ ने दोषियों को खुले शिविरों में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था, जबकि राजेंद्र @ गोरू बनाम राजस्थान राज्य मामले में दूसरी खंडपीठ ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ऐसा स्थानांतरण अस्वीकृत किया था।
सरकार का विरोध
सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने तर्क दिया कि POCSO एक्ट के तहत दोषियों को खुले शिविरों में स्थानांतरित करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे अन्य कैदियों के परिवारों में भय उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे दोषियों को खुले शिविरों में रखने से बच्चों की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
न्यायालय का निर्णय
न्यायालय ने इन विरोधाभासी निर्णयों को ध्यान में रखते हुए, इस मामले को बड़ी पीठ को भेजने का निर्णय लिया है, ताकि इस कानूनी प्रश्न पर स्पष्टता प्राप्त की जा सके और भविष्य में समान मामलों में एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।
यह मामला कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अपराधियों के पुनर्वास और समाज में उनकी पुनःस्थापना के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। बड़ी पीठ का निर्णय इस विषय पर स्पष्टता प्रदान करेगा और भविष्य में समान मामलों में मार्गदर्शन करेगा।