सूचना एवं संपर्क विभाग के सहायक निदेशक हरि शंकर आचार्य और साहित्यकार डॉ. रेणुका व्यास नीलम का चयन
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-14 06:19:02

राजस्थान की साहित्यिक और प्रशासनिक धरोहर: हरि शंकर आचार्य और डॉ. रेणुका व्यास को मिलेगा प्रतिष्ठित माणक अलंकरण
राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा दिए जाने वाले प्रतिष्ठित माणक अलंकरण के लिए इस बार सूचना एवं संपर्क विभाग के सहायक निदेशक हरि शंकर आचार्य और साहित्यकार डॉ. रेणुका व्यास नीलम का चयन किया गया है। यह पुरस्कार उनकी साहित्यिक और जनसंपर्क क्षेत्र में अद्वितीय योगदान को मान्यता देने का प्रतीक है।
हरि शंकर आचार्य: जनसंपर्क और हिंदी के प्रति समर्पण
हरि शंकर आचार्य, जो सूचना एवं संपर्क विभाग में सहायक निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, को जनसंपर्क कर्मी के रूप में माणक अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। वे राज्य के पहले और इकलौते जनसंपर्क अधिकारी हैं, जिन्हें राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया था।
आचार्य ने हिंदी भाषा को प्रोत्साहित करने और जनसंपर्क सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारियों को सम्मानित करने जैसी पहल की हैं। उनकी हिंदी में एक और राजस्थानी में दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जो उनकी साहित्यिक क्षमता को दर्शाती हैं। उनकी लेखनी में परंपरा और समसामयिकता का सुंदर समन्वय झलकता है।
डॉ. रेणुका व्यास ‘नीलम’: राजस्थानी साहित्य की ध्वजवाहक
डॉ. रेणुका व्यास ‘नीलम’ को राजस्थानी महिला साहित्यकार के रूप में माणक अलंकरण प्रदान किया जाएगा। डॉ. व्यास की साहित्यिक उपलब्धियां राजस्थानी और हिंदी दोनों भाषाओं में हैं। उनकी हिंदी और राजस्थानी की पांच-पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
उन्हें राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी का मुरलीधर व्यास राजस्थानी कथा साहित्य पुरस्कार और हिंदी साहित्य अकादमी का विशिष्ट पुरस्कार भी मिल चुका है। इसके अलावा, वे विभिन्न समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेखन करती रही हैं, जो उनकी सक्रियता और साहित्यिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
माणक अलंकरण चयन समिति की घोषणा
इस सम्मान के लिए चयन प्रक्रिया बेहद सटीक और कठोर होती है। माणक अलंकरण चयन समिति ने हरि शंकर आचार्य और डॉ. रेणुका व्यास के कार्यों का गहन अध्ययन और मूल्यांकन कर उनके नामों की घोषणा की। यह पुरस्कार साहित्य और जनसंपर्क के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय सेवा का सम्मान है।
आचार्य और व्यास का योगदान: साहित्य से समाज तक
हरि शंकर आचार्य और डॉ. रेणुका व्यास दोनों ने अपनी-अपनी विधाओं में अद्वितीय योगदान दिया है। आचार्य ने जहाँ जनसंपर्क के क्षेत्र में नवाचार किए हैं, वहीं डॉ. व्यास ने राजस्थानी साहित्य को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। उनकी रचनाएं न केवल साहित्यिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।
सम्मान के मायने: प्रेरणा और पहचान
माणक अलंकरण न केवल सम्मानित व्यक्तियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह साहित्य और जनसंपर्क के क्षेत्र में काम कर रहे अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
हरि शंकर आचार्य और डॉ. रेणुका व्यास का सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का नहीं, बल्कि उन मूल्यों का भी सम्मान है, जो हिंदी और राजस्थानी साहित्य तथा जनसंपर्क को समृद्ध बनाते हैं।