कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉक्टर गुंजन सोनी ने सारस्वत के इस निर्णय की सराहना की
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-13 09:43:07

अमर सेवा की मिसाल: देहदानी आरएएस ओमप्रकाश सारस्वत की देह मेडिकल कॉलेज को सौंपी
एक प्रेरणादायक घटना में, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के शरीर रचना विभाग ने बुधवार को सेवानिवृत आरएएस ओमप्रकाश सारस्वत के पार्थिव शरीर को प्राप्त किया। यह महान कार्य उनके परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए किया। सारस्वत का यह कदम समाज में चिकित्सा शिक्षा और मानवता के लिए एक मिसाल बन गया है।
प्राचार्य ने दी श्रद्धांजलि और सराहा निर्णय
कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉक्टर गुंजन सोनी ने सारस्वत के इस निर्णय की सराहना की और कहा, "यह निर्णय समाज को कुशल चिकित्सक प्रदान करने की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय कदम है।" उन्होंने परिजनों को सांत्वना देते हुए कहा कि इस तरह के कदम समाज में जागरूकता लाने और लोगों को देहदान के लिए प्रेरित करने में सहायक होंगे।
देहदान की प्रक्रिया और परिजनों की भूमिका
देहदान की प्रक्रिया का संचालन एनाटॉमी विभाग के डॉ. राकेश मणि ने किया। इस दौरान सारस्वत की पुत्री ऋचा सारस्वत भी मौजूद रहीं। उन्होंने अपने पिता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस निर्णय पर गर्व व्यक्त किया। यह एक ऐसा क्षण था जिसने परिवार और समाज को गहराई से प्रभावित किया।
कॉलेज की टीम और उनकी उपस्थिति
इस अवसर पर कॉलेज के अन्य अधिकारी और कर्मचारी जैसे डॉ. कालूराम मीना, डॉ. जितेंद्र आचार्य, कमलेश कुमार व्यास, और अनूप गौतम भी मौजूद रहे। उन्होंने इस महान कार्य में अपने सहयोग से इसे और भी गरिमामय बना दिया।
देहदान जागरूकता अभियान का प्रभाव
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गुंजन सोनी द्वारा चलाए जा रहे देहदान जागरूकता अभियान का असर साफ दिखाई दे रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अब इस अभियान से प्रेरित होकर देहदान संकल्प पत्र भरने के लिए कॉलेज पहुंच रहे हैं। यह अभियान न केवल चिकित्सा शिक्षा को प्रोत्साहित कर रहा है, बल्कि समाज में परोपकार और मानवता की भावना को भी मजबूत कर रहा है।
सार्वजनिक प्रेरणा और सामाजिक बदलाव
ओमप्रकाश सारस्वत का यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बन गया है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि मृत्यु के बाद भी समाज के लिए योगदान देना संभव है। यह कदम सामाजिक बदलाव का एक उदाहरण बन गया है, जिसमें लोग देहदान के महत्व को समझने लगे हैं।
जागरूकता का संदेश
इस घटना ने न केवल चिकित्सा क्षेत्र में योगदान दिया है, बल्कि समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है। देहदान के माध्यम से, व्यक्ति न केवल चिकित्सा शिक्षा को प्रोत्साहित करता है, बल्कि अपने जीवन को एक नई दिशा भी देता है।
देहदान का यह महान निर्णय समाज में परोपकार और मानवता की नई परिभाषा गढ़ता है।