विदेशों में छिपे आतंकियों और अपराधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी ♦ अब नए आपराधिक कानूनों के तहत होगी ट्रायल इन एब्सेंटिया ♦ बदलते कानून, मजबूत न्याय प्रणाली की ओर बढ़ते कदम 


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-12-12 14:02:21



 

भारत सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल ही में तीन नए आपराधिक कानून देश को समर्पित किए। इन कानूनों के तहत, भारत से फरार आतंकियों, आर्थिक अपराधियों और ड्रग माफियाओं को अब कड़ी सजा का सामना करना होगा। नए प्रावधान ट्रायल इन एब्सेंटिया जैसे क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं, जो पहले संभव नहीं थे।

नए कानूनों की झलक: अपराधियों पर नकेल कसने का प्रयास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 दिसंबर, 2023 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023', भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023का शुभारंभ किया। इनमें ट्रायल इन एब्सेंटिया जैसे प्रावधान शामिल हैं, जो विदेशों में छिपे अपराधियों पर कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

चंडीगढ़ पुलिस के डीजी एसएस यादव ने बताया, "हमने 1500 प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की हैं। नए प्रावधानों के तहत, अपराधियों पर उनकी अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाया जा सकता है।" उन्होंने कहा कि अब अपराधियों को पकड़े जाने के बाद सीधे सजा दी जाएगी।

विदेशों में छिपे अपराधी: कानून से बच नहीं पाएंगे

कई खालिस्तानी आतंकवादी, ड्रग माफिया और गैंगस्टर वर्तमान में कनाडा, यूके और अमेरिका जैसे देशों में छिपे हुए हैं। एसएस यादव ने बताया कि इन अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस अब नया डेटा नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करेगी। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) और चित्रखोज के जरिए अपराधियों का पता लगाया जाएगा।

डिजिटल क्रांति: कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता

चंडीगढ़ पुलिस ने डिजिटल तकनीकों का उपयोग करते हुए पूरे आपराधिक न्याय प्रणाली को ऑनलाइन कर दिया है। पुलिस अधिकारी कंवरदीप कौर ने बताया, "ई-समन, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल प्रॉसेक्यूशन के जरिए अब मामलों की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज हो गई है।"

उन्होंने बताया कि नए कानूनों के तहत, शिकायत के 90 दिनों के भीतर पीड़ित को मामले की प्रगति की जानकारी देना अनिवार्य है। साथ ही, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में जांच 60 दिनों में पूरी करनी होगी।

शून्य एफआईआर और भाषिनी ऐप का महत्व

नए कानूनों में क्षेत्राधिकार की समस्या खत्म कर दी गई है। अब किसी भी पुलिस स्टेशन में शून्य एफआईआरदर्ज की जा सकती है। कंवरदीप कौर ने बताया, "इस साल चंडीगढ़ में 14 शून्य एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें से ज्यादातर हरियाणा और दिल्ली से संबंधित हैं।"

भाषिनी ऐप के माध्यम से 22 भारतीय भाषाओं में एफआईआर दर्ज करने की सुविधा दी गई है, जिससे न्याय प्रणाली को और सुलभ बनाया जा सके।

महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर विशेष जोर

कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है। कौर ने बताया कि पोस्को और बलात्कार के मामलों में पुलिस को 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। यह बदलाव न केवल त्वरित न्याय सुनिश्चित करेगा बल्कि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई के लिए प्रेरित करेगा।

कानून का प्रभाव और चुनौतियां

नए कानूनों के लागू होने के साथ, सरकार ने अपराध और न्याय प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन लाने का प्रयास किया है। हालांकि, इसे प्रभावी रूप से लागू करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा।


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