सेना में लैफ्टिनेंट कर्नल को न्याय: सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्थायी कमीशन का आदेश


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-12-10 20:15:14



 

भारतीय सेना की लैफ्टिनेंट कर्नल को न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। एक महिला अधिकारी, जिन्हें स्थायी कमीशन से वंचित कर दिया गया था, अब न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद वह अधिकार प्राप्त करेंगी।

मामले का विवरण

महिला लैफ्टिनेंट कर्नल, जिन्हें 2008 में सेना के डेंटल कॉर्प्स में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत नियुक्त किया गया था, ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामला 2013 की संशोधित नीति से संबंधित था, जिसमें उन्हें स्थायी कमीशन के तीसरे मौके से वंचित कर दिया गया था, जबकि अन्य समान परिस्थिति में नियुक्त अधिकारियों को यह मौका दिया गया था।

अदालत का महत्वपूर्ण अवलोकन

न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस अधिकारी को स्थायी कमीशन न देना भेदभावपूर्ण था। अदालत ने कहा,

"यदि अन्य अधिकारियों को आयु सीमा में छूट दी गई और उन्हें पुरानी नीति के तहत मौका दिया गया, तो याचिकाकर्ता को भी यही लाभ मिलना चाहिए था।"

अन्य मामलों का उल्लेख

अदालत ने अमृत लाल बेरी बनाम कलेक्टर ऑफ सेंट्रल एक्साइज (1975) और के.आई. शेफर्ड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (1987) के मामलों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि सरकार के खिलाफ फैसले का लाभ समान स्थिति वाले सभी नागरिकों को मिलना चाहिए, भले ही उन्होंने अदालत में याचिका दायर की हो या नहीं।

सरकार का तर्क खारिज

सरकार ने तर्क दिया कि चूंकि याचिकाकर्ता ने पहले किसी मुकदमे में हिस्सा नहीं लिया, इसलिए उन्हें लाभ नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि यह तर्क सैनिकों के प्रति अनुचित होगा, जो कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा करते हैं।

अदालत के निर्देश

अदालत ने आदेश दिया:

याचिकाकर्ता को उन अधिकारियों के समान तारीख से स्थायी कमीशन प्रदान किया जाए, जिन्हें पहले यह लाभ दिया गया था।

उन्हें वरिष्ठता, पदोन्नति और वित्तीय लाभ सहित सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं।

यह आदेश चार सप्ताह के भीतर लागू किया जाए।

न्याय का महत्व

यह निर्णय न केवल याचिकाकर्ता के लिए बल्कि सेना में सेवा कर रहे उन सभी अधिकारियों के लिए एक मिसाल है, जो भेदभाव का शिकार हो सकते हैं। यह न्यायपालिका का संदेश है कि सेवा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ समानता और निष्पक्षता से व्यवहार किया जाना चाहिए।


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