आरोप पत्र दायर होने के बाद भी निरस्तीकरण याचिका दायर कर सकते हैं आरोपी: सुप्रीम कोर्ट 


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-12-10 19:43:12



 

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि आरोपी दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.P.C.) की धारा 482 के तहत आरोप पत्र दायर होने के बाद भी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने के लिए याचिका दायर कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि निरस्तीकरण याचिका में आरोपमुक्ति याचिका की तुलना में अधिक व्यापक चुनौती दी जा सकती है।

मामले का विवरण

यह मामला उत्तर प्रदेश के एक आरोपी द्वारा दायर की गई याचिका से संबंधित है, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने आरोप पत्र दायर होने के बाद निरस्तीकरण याचिका को 'निरर्थक' घोषित करते हुए खारिज कर दिया था।

अदालत का अवलोकन

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की खंडपीठ ने कहा, "हम राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण को देखकर आश्चर्यचकित हैं। राज्य सरकार द्वारा जो सुझाव दिया गया, वह यह है कि एक बार आरोप-पत्र दाखिल हो जाने के बाद आरोपी आरोप तय होने तक प्रतीक्षा करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता। उसके बाद आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने के लिए पुनर्विचार आवेदन दायर कर सकता है।"

निरस्तीकरण याचिका और आरोपमुक्ति याचिका में अंतर

अदालत ने स्पष्ट किया कि निरस्तीकरण याचिका में आरोपमुक्ति याचिका की तुलना में अधिक व्यापक चुनौती दी जा सकती है। निरस्तीकरण याचिका में आरोपी उन दस्तावेजों पर भी भरोसा कर सकते हैं जो आरोप पत्र का हिस्सा नहीं हैं, जबकि आरोपमुक्ति याचिका में ऐसा संभव नहीं है।

अदालत के निर्देश

अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए मामले को पुनः विचार के लिए उच्च न्यायालय में भेज दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि मामले को 6 जनवरी 2025 को सूचीबद्ध किया जाए।


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