क्या राजनीतिक दलों पर लागू होगा PoSH एक्ट? सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण सुझाव
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-10 06:00:40

क्या राजनीतिक दलों पर लागू होगा PoSH एक्ट? सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण सुझाव
क्या राजनीतिक दलों पर भी महिला कार्यस्थल उत्पीड़न (रोकथाम, निवारण और निवारण) अधिनियम (PoSH Act) लागू किया जा सकता है? इस सवाल का उत्तर अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण सुझाव से सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अगर किसी याचिकाकर्ता को राजनीतिक दलों के संदर्भ में PoSH एक्ट को लागू करने में समस्या हो, तो पहले चुनाव आयोग (ECI) से संपर्क करें और यदि चुनाव आयोग कोई कदम नहीं उठाता है, तो ही न्यायालय में अपील करें।
याचिकाकर्ता का मामला और PoSH एक्ट का संदर्भ
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में एक याचिकाकर्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता योगमाया एमजी द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा PoSH एक्ट के अनुपालन में विफलता को उजागर किया था। विशेष रूप से, इस अधिनियम के तहत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के गठन में पार्टी विफल रही हैं, जो कि कार्यस्थल उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई और समाधान के लिए अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को पहले चुनाव आयोग से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि चुनाव आयोग के पास इस संदर्भ में उचित कार्रवाई करने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि चुनाव आयोग कोई कदम नहीं उठाता, तो याचिकाकर्ता अदालत में पुनः आवेदन कर सकती हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने इस मामले पर विचार करते हुए यह टिप्पणी की।
आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का महत्व
योगमाया ने अपनी याचिका में यह कहा कि राजनीतिक दलों के पास कोई मानक ICC नहीं है, जो कि एक समस्या है, क्योंकि इससे महिला उत्पीड़न के मामलों की रिपोर्टिंग और निवारण में कठिनाई होती है। उनका यह भी कहना था कि पारदर्शिता की कमी, अपर्याप्त संरचनाएं, और ICC के असंगत कार्यान्वयन से एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा मिलता है, जो महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को प्राथमिकता नहीं देती।
केरल हाई कोर्ट का विचार और PoSH एक्ट का आवेदन
सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि केरल हाई कोर्ट का यह दृष्टिकोण कि राजनीतिक दलों में कोई नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं होता, कुछ हद तक सही हो सकता है। इससे PoSH एक्ट का इन दलों पर लागू होना कठिन हो सकता है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में, जहां नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं होते, PoSH एक्ट को लागू किया जा सकता है, जैसे कि ठेके पर काम करने वाले श्रमिकों के मामले में।
चुनाव आयोग की भूमिका और आगे की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी है और यदि चुनाव आयोग कार्रवाई में विफल रहता है, तो वह पुनः न्यायालय का रुख कर सकती हैं। अदालत ने इस मामले में फिलहाल हस्तक्षेप न करने का निर्णय लिया और इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई के लिए याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग के पास जाने का निर्देश दिया।
न्यायालय में उपस्थिति और याचिकाकर्ता के वकील
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता, श्रीराम पराकट और दीपक प्रकाश ने किया।
इस मामले ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है कि क्या PoSH एक्ट को राजनीतिक दलों पर लागू किया जा सकता है, खासकर तब जब राजनीतिक दलों में पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस मुद्दे पर पहले कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी है, लेकिन यह तय करना अब बाकी है कि क्या इस अधिनियम को राजनीतिक दलों पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।