गुवाहाटी उच्च न्यायालय का अहम फैसला: शो कॉज़ नोटिस के बिना जीएसटी की कार्यवाही अवैध


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-12-09 08:54:38



 

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि जीएसटी DRC-01 के तहत शो कॉज़ नोटिस का सारांश जारी करना, केंद्रीय और राज्य जीएसटी कानून के तहत एक उचित शो कॉज़ नोटिस जारी करने की आवश्यकता को समाप्त नहीं करता है। इस फैसले ने जीएसटी के मामलों में उचित प्रक्रिया का पालन करने की जरूरत को फिर से रेखांकित किया।

संबंधित मामला: शो कॉज़ नोटिस की कमी पर असंतोष

यह मामला उस समय सामने आया जब एक करदाता (assessee) ने असम राज्य जीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 73 के तहत वाणिज्यिक कर अधिकारी (respondent no.2) द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी। करदाता ने अपनी याचिका में यह कहा कि उसे धारा 73(1) के तहत उचित और पूर्व शो कॉज़ नोटिस नहीं दिया गया था, बल्कि उसे केवल शो कॉज़ नोटिस का सारांश (Summary of Show Cause Notice) GST DRC-01 फॉर्म में भेजा गया था। करदाता का यह आरोप था कि इस सारांश को उचित शो कॉज़ नोटिस के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट का अहम अवलोकन: शो कॉज़ नोटिस की अनिवार्यता

न्यायमूर्ति मनीष चौधरी की पीठ ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "शो कॉज़ नोटिस, बयान और आदेश का सारांश केवल एक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह उन सभी दस्तावेजों का स्थान नहीं ले सकता जो शो कॉज़ नोटिस के तहत जारी किए जाने चाहिए।" अदालत ने यह स्पष्ट किया कि धारा 73 के तहत कार्यवाही की शुरुआत और आदेश पारित होने के परिणाम होते हैं, और इसलिए इन सभी दस्तावेजों को पूरी प्रक्रिया के तहत पारित किया जाना चाहिए।

क्या सारांश शो कॉज़ नोटिस के स्थान पर काम कर सकता है?

कोर्ट ने यह भी माना कि जीएसटी DRC-01 फॉर्म में शो कॉज़ नोटिस का सारांश जारी करना, जीएसटी कानून के तहत शो कॉज़ नोटिस के लिए आवश्यक प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता। जीएसटी के तहत शो कॉज़ नोटिस और टैक्स निर्धारण का बयान अलग-अलग दस्तावेज होते हैं, और इन्हें सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

न्यायालय ने यह बताया कि शो कॉज़ नोटिस के सारांश के साथ जो टैक्स निर्धारण का बयान जुड़ा होता है, वह केवल धारा 73(3) के तहत टैक्स निर्धारण को संदर्भित करता है और इसका उद्देश्य शो कॉज़ नोटिस की प्रक्रिया को पूर्ण करना नहीं होता। न्यायमूर्ति चौधरी ने यह भी कहा कि बिना शो कॉज़ नोटिस के कार्यवाही शुरू करना कानूनी रूप से गलत है और इस प्रकार इस पर हस्तक्षेप किया गया।

फैसला: शो कॉज़ नोटिस के बिना कार्यवाही अवैध

अदालत ने इस मामले में करदाता की याचिका को मंजूरी दी और कहा कि जब तक उचित शो कॉज़ नोटिस जारी नहीं किया जाता, तब तक धारा 73 के तहत कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती। इस फैसले ने स्पष्ट किया कि जीएसटी कानून के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है, ताकि करदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जा सके और किसी भी प्रकार की अनावश्यक कानूनी कठिनाई से बचा जा सके।

प्रक्रिया का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण

गुवाहाटी उच्च न्यायालय का यह फैसला यह दर्शाता है कि जीएसटी जैसे जटिल कानूनी मामलों में सभी प्रक्रिया के कदमों का पालन किया जाना चाहिए। उचित शो कॉज़ नोटिस का अभाव किसी भी कार्यवाही को कानूनी रूप से अवैध बना सकता है। इस निर्णय से यह भी स्पष्ट होता है कि करदाताओं को अपने अधिकारों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अदालत में जाने का विकल्प है, जब किसी प्रक्रिया का उल्लंघन किया जाता है।


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